नई शराब नीति आने के बाद सरकार और विपक्ष के बीच सियासी जंग छिड़ गई है। कांग्रेस ने रविवार को राज्य सरकार पर जमकर जुबानी प्रहार किए। मोर्चे पर एक तरफ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष चीफ प्रीतम सिंह डटे, तो दूसरे मोर्चे पर पूर्व सीएम हरीश रावत खडे़ दिखाई दिए।
दोनों ने अपने बयानों में सरकार पर नई शराब नीति के बहाने माफिया को स्थापित करने का आरोप लगाया। पलटवार करने में आबकारी मंत्री प्रकाश पंत भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की शराब नीति में माफिया का एकाधिकार बढ़ा था। हमने इसे तोड़ने की कोशिश की है।
इस बार की शराब नीति में राज्य सरकार कई नए बदलाव लेकर सामने आई है, जिसमें जिलों को टारगेट और पॉवर के अलावा पहाड़ में दुकानों के खुलने के समय में कटौती की गई है। इसे लेकर विपक्ष और सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
रविवार को मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में पीसीसी चीफ प्रीतम सिंह ने कहा कि सरकार ने माफिया को फूलने-फलने के पूरे अवसर प्रदान कर दिए हैं। जिस समय शराब की दुकानें बंद होंगी, उस वक्त से माफिया का काम शुरू हो जाएगा। तस्करी बढे़गी और सरकार के राजस्व में कमी आएगी।
पूर्व सीएम हरीश रावत ने पीसीसी चीफ की बात को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा इस नीति से राजस्व की हानि होगी। माफिया को लाभ के अलावा लोगों को अब घटिया क्वालिटी की शराब मिलेगी।
कांग्रेस के दोनों दिग्गजों के आरोपों का आबकारी मंत्री प्रकाश पंत ने पुरजोर जवाब दिया। उन्होंने कहा है कि पिछली सरकार शराब नीति को लेकर खासी बदनाम रही थी। एक खास ब्रांड के लिए सरकार की दिलचस्पी किसी से छिपी नहीं रही। हमारी कोशिश माफिया का एकाधिकार तोड़ने की है। कांग्रेस इस नीति के आने के बाद बौखला गई है।