गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने से पहले भीषण बर्फबारी ने गोमुख क्षेत्र में पर्यटकों के कदम थाम लिए हैं। भारत-चीन सीमा से लगे नेलांग एवं जाढ़ूंग गांव का भ्रमण करने पहुंचे पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर को भी भैरोंघाटी से वापस लौटना पड़ा। शुक्रवार के गोमुख क्षेत्र में गए सभी 35 पर्यटक सुरक्षित वापस लौट आए हैं। जबकि शिवलिंग हिमशिखर पर आरोहण के लिए गए एक पर्वतारोही दल अब भी मौसम खुलने के इंतजार में बेस कैंप के आसपास डेरा डाले हुए है।
गंगोत्री नेशनल पार्क के वन क्षेत्राधिकारी प्रताप पंवार ने बताया कि सीमावर्ती हिमालयी क्षेत्र में भारी बर्फबारी के चलते पर्यटन सचिव नेलांग जाढ़ूंग नहीं जा पाए। उन्होंने हर्षिल, बगोरी आदि क्षेत्रों का दौरा कर पर्यटन संभावनाओं का जायजा लिया। रेंजर पंवार ने बताया कि यूं तो गंगोत्री नेशनल पार्क आगामी 15 नवंबर तक खुला है, लेकिन शनिवार को हुई भीषण बर्फबारी के बाद गंगोत्री से आगे जाने की स्थिति नहीं है। फिलहाल पर्यटकों को आगे नहीं जाने दिया जा रहा है। मौसम खुलने पर ही पर्यटकों को गोमुख तक जाने की अनुमति दी जा सकती है।
खेती के लिए लाभदायक है बारिश
शनिवार सुबह से कर्णप्रयाग, पिंडरघाटी और गैरसैंण में बारिश हुई। देवाल के रूपकुंड और बेदनी बुग्यालों में हुई बर्फबारी से निचले क्षेत्रों में ठंड बढ़ गई है। वहीं कर्णप्रयाग में सुबह से लगातार हो रही बारिश के कारण लोगों ने अलाव जलाकर ठंड से बचाव किया। थराली, नारायणबगड़, गैरसैंण, गौचर, आदिबदरी में भी बारिश हुई। हालांकि कृषि विज्ञान केंद्र ग्वालदम के वैज्ञानिक डा. अजय प्रभाकर और डा. अनिल चंद्रा ने इस बारिश को रबि की फसल के लिए लाभदायक बताया।
मौसम की बदली करवट के बीच जौनसार बावर की ऊंची चोटियों पर मौसम का पहला हिमपात हुआ। खंडबा, मुंडाली, देववन, माइला टॉप, कांडीधार की ऊंची चोटियां बर्फ से ढक गई हैं। वहीं, हिमपात से पूरा क्षेत्र कड़ाके की ठंड की चपेट में आ गया है। पहाड़ी अंचलों में अलाव और हीटर जल उठे हैं। शनिवार को ठंड से बचने के लिए दिनभर लोग अलाव और हीटर के आसपास बैठे नजर आए। वहीं मैदानी इलाकों में भी पारा खासा लुढ़क गया है। ठंडी हवाएं दिनभर यहां सिहरन पैदा करती रहीं।
इससे पूर्व सुबह के समय क्षेत्र में झमाझम बारिश भी हुई। शनिवार को चकराता का अधिकतम तापमान 11 डिग्री और न्यूतनम 6 डिग्री रहा। विकासनगर का अधिकतम तापमान 23 डिग्री और न्यूनतम 14 डिग्री रहा। शनिवार को तड़के सुबह पांच बजे से ही क्षेत्र में बादलों की तेज गड़गड़ाहट के बीच बादलों ने बरसना शुरू कर दिया। सुबह 10 बजे तक क्षेत्र में रुक-रुक कर बारिश होती रही। इसके बाद चली ठंडी हवाओं ने लोगों को सिहरन का एहसास करा दिया।
पहाड़ी इलाकों में हुई बारिश से शाम ढलते ही बाजार में सन्नाटा पसर गया। दोपहर के समय में भी बाजार में कम चहल-पहल नजर आई। वहीं नवंबर के पहले पखवाड़े में कई सालों बाद हुई बर्फबारी को लोग फसलों और जलस्रोतों के लिए अच्छा मान रहे हैं। अमूमन इन चोटियों में दिसंबर में ही हिमपात होता है। ऐसे में कई सालों बाद ऊंची चोटियों पर हिमपात देख लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ गई है।
पछवादून और जौनसार बावर क्षेत्र में हुई बारिश फसलों के लिए नेमत बन बरसी है। जिसे देख काश्तकारों के चेहरे खिल उठे हैं। बारिश मटर, मसूर, गेहूं, आलू, लहसुन की फसल की बुआई के लिए खासा मुफीद है। इसके साथ ही बारिश बंद गोभी, फूल गोभी, मिर्च और बैंगन की फसल की रोपाई के लिए भी खासा लाभदायक है। कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसएस सिंह ने बताया कि बारिश उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में पैदा होने वाली अदरक की फसल के लिए भी खासा लाभदायक है। इससे लंबे समय तक जमीन में नमी बनी रहेगी।
बिजली गिरने से तीन बैलों की मौत
कालसी तहसील क्षेत्र के बिनोऊ गांव में आकाशीय बिजली गिरने से तीन बैलों की मौत हो गई। बैलों की मौत से पशुपालक सदमे में है। उन्होंने तहसील प्रशासन से मुआवजे की गुहार लगाई है। शनिवार को क्षेत्र में मौसम की बदली करवट के बीच गांव निवासी परम सिंह पुत्र धन सिंह की नेवटी छानी स्थित गोशाला में आकाशीय बिजली गिरने से तीन बैलों की मौत हो गई। घटना के समय छानी में पांच मवेशी थे। जिसमें एक गाय और एक बछड़ा दूसरे कमरे में बंधे हुए थे। पशुपालक छानी से कुछ दूरी पर चारा काट रहा था। जिससे ये सभी बाल-बाल बच गए। तहसीलदार शक्ति प्रसाद उनियाल का कहना है कि मामले में पटवारी से रिपोर्ट मांगी गई है।
देहरादून से बदरीनाथ धाम जा रहे हैरिटेज कंपनी के हेलीकॉप्टर को मौसम की खराबी के कारण आईटीबीपी गौचर के हैलीपैड पर इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। करीब दो घंटे बाद मौसम खुलने पर कंपनी का हेलीकॉप्टर पांच यात्रियों को लेकर देहरादून लौट गया।
शनिवार को हैरिटेज कंपनी का हेलीकाप्टर देहरादून से दिल्ली के पांच यात्रियों को लेकर बदरीनाथ रवाना हुआ। हेलीकॉप्टर चमोली पहुंचा ही था कि अचानक मौसम खराब होने के कारण कोहरा आ गया। ऐसे में हेलीकॉप्टर इमरजेंसी लैंडिंग के लिए चमोली से लौटने लगा और कर्णप्रयाग-गौचर के बीच लैंडिंग की लोकेशन ढूंढने लगा।
हेलीकॉप्टर ने नगर क्षेत्र से मात्र 100 मीटर की ऊंचाई से दो चक्कर लगाए और पौने बारह बजे आईटीबीपी आठवीं वाहिनी गौचर के हेलीपैड पर इमरजेंसी लैंडिंग की। दोपहर दो बजे मौसम साफ हुआ तो हेलीकॉप्टर यात्रियों को लेकर देहरादून के लिए रवाना हुआ। आईटीबीपी के कमांडेंट गिरीश चंद्र पुरोहित ने बताया कि हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान वाहिनीं के जवानों ने पायलट और यात्रियों का सहयोग किया। हैरिटेज कंपनी के निदेशक रोहित माथुर ने बताया कि मौसम की खराबी के कारण हेलीकॉटर को इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी।