मातृ वंदन योजना
इसके तहत गर्भवती महिलाओं को पहली बेटी के जन्म पर दो किश्तों में पांच हजार रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। उसके बाद दूसरी संतान भी बेटी हुई तो छह हजार रुपये की एकमुश्त प्रोत्साहन राशि सीधे बैंक खाते में दी जाती है। योजना का लाभ उठाने के लिए गर्भवती महिलाओं को आंगनबाड़ी या स्वास्थ्य केंद्र पर पंजीकरण कराना होता है।
जिलावार प्रदर्शन (1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 तक)
पौड़ी गढ़वाल में पहली बालिका के जन्म पंजीकरण का लक्ष्य 1790 रखा गया था, जिसमें 1926 पंजीकरण हुए। वहीं दूसरी संतान भी बालिका होने का अनुमानित लक्ष्य 596 रखा गया था, जिसमें 607 पंजीकरण हुए। इस तरह पौड़ी में सफलता दर 106 फीसदी रही। इसी तरह देहरादून, बागेश्वर और ऊधम सिंह नगर ने भी अपने कुल पंजीकरण लक्ष्य को 100 फीसदी से अधिक हासिल किया है। अन्य कई जिलों में भी प्रगति संतोषजनक रही। चमोली में तय लक्ष्य से 88 फीसदी, चंपावत में 76 फीसदी, नैनीताल में 84 फीसदी, रुद्रप्रयाग में 98 फीसदी और उत्तरकाशी में 79 फीसदी पंजीकरण दर्ज किए गए।
ये जिले पिछड़े
पिथौरागढ़ में लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 45 फीसदी पंजीकरण ही दर्ज हुए, जो विभाग की चिंता का विषय है। हरिद्वार में 73 फीसदी और टिहरी गढ़वाल में भी 75 फीसदी पंजीकरण हुए।
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पहली और दूसरी बालिका के जन्म पंजीकरण में उत्साहजनक प्रगति देखने को मिली है। नए वित्तीय वर्ष में नया लक्ष्य निर्धारित, ताकि राज्य के प्रत्येक जिले में कोई मां सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे, जिन जिलों में पंजीकरण कम हुए, वहां कारणों की समीक्षा की जाएगी। -प्रशांत आर्य, निदेशक, महिला सशक्तीकरण एवं बाल कल्याण