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OMG: उत्तराखंड में हैं चिड़ियों की 600 प्रजाति

Mon, 06 Jul 2015 03:21 PM IST
रवींद्र पांडे रवि/ अमर उजाला, नैनीताल
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प्रख्यात पर्यावरणविद्, ट्रैकर और वन्यजीव फोटोग्राफर दुष्यंत पाराशर ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थिति वन्य जीव एवं पक्षियों के लिए अनुकूल है।
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यही कारण है कि यहां भारतीय उपमहाद्वीप में पाई जानी वाली चिड़ियों की 1300 प्रजातियों में से 600 प्रजातियां मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इसका पर्यटन के रूप में बेहतर इस्तेमाल कर सकती है। अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि दुर्लभ प्रजाति की ग्रेट हार्नविल का उत्तराखंड में पाया जाना बड़ी बात है।

यह एक मीटर लंबी होती है और इसकी रफ्तार काफी तेज होती है। इसके अलावा दुर्लभ रुबीथ्रूट भी यहां देखी जाने लगी है। सातताल में उन्होंने इस चिड़ियां को अपने कैमरे में कैद किया। इसके अलावा भी यहां चिड़ियों की विशिष्ट 600 प्रजातियां हैं। बता दें कि श्री पाराशर ने 1972 में दिल्ली कालेज ऑफ आर्ट्स से स्नातक ग्रेफिक डिजाइनर से कॅरिअर की शुरुआत की।
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विभिन्न चर्चित विज्ञापनों के वह क्रिएटिव डायरेक्टर रहे। 1980 के बाद उन्होंने अरुणांचल, लद्दाख, सार्क मरूस्थल समेत विभिन्न क्षेत्रों में ट्रैकिंग की। फूलों की घाटी में बेरोकटोक आवाजाही के खिलाफ आवाज उठाने वाले श्री पाराशर को नंदा देवी नेशनल पार्क के नामांतरण का श्रेय भी जाता है।

हिमालयी पर्यावरण, एनसी हिल्स, ए किंगडम इन द स्काई, टी लैजेंड, डांस डिवाइन, लाइफ एंड लिविलिहुड आफ इंडिया, वोडो लैंड समेत सात विक्टोरियल पुस्तक लिख चुके श्री पाराशर की काजीरंगा और अंडमान निकोबार पर दो पुस्तकें आने वाली हैं।
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श्री पाराशर का कहना है कि मूलत: वह दिल्ली के रहने वाले हैं, लेकिन उत्तराखंड से उनका पुराना नाता रहा है। इसी लिए उन्होंने सातताल में भी घर बनाया है। उन्होंने कहा कि यदि हम पर्यावरण को ठीक रख पाएंगे तो भविष्य में चिड़ियां की प्रजाति भी जीवित रहेंगी। सभी को इस वास्तविकता को समझना होगा।
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