बर्ड फ्लू के खतरे को देखते हुए जिले में संबंधित विभाग अलर्ट हो गए हैं। रविवार को जोशियाड़ा क्षेत्र में एक पक्षी मृत मिला, जिसका सैंपल जांच के लिए भोपाल भेज दिया गया है। एहतियात के तौर पर अभी तक जिले से 375 मुर्गों के सैंपल जांच के लिए भेजे जा चुके हैं।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. प्रलयंकर नाथ ने बताया कि बर्ड फ्लू को लेकर पूरी एहतियात बरती जा रही है। सभी पशु चिकित्सा अधिकारियों को निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। बाहरी क्षेत्रों से जिले में बिक्री के लिए आ रहे मुर्गों की जांच की जा रही है। रविवार को जोशियाड़ा क्षेत्र में एक पक्षी मृत पाए जाने पर लोग सतर्क हो गए।
स्थानीय निवासी अनुराग रावत ने इस संबंध में पशुपालन एवं वन विभाग को तत्काल सूचना दी। डीएफओ दीपचंद आर्य ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए तत्काल वन विभाग की टीम को मौके पर भेजा। टीम ने मृत पक्षी के सैंपल जांच के लिए भेज दिए हैं।
वन विभाग ने भी जंगल में बर्ड फ्लू को लेकर अलर्ट जारी किया है, लेकिन, कर्मचारियों की सुरक्षा के उपाय नहीं किए हैं। विभागीय लापरवाही का आलम यह है कि जंगल में गश्त कर रहे वन कर्मियों को संक्रमित पक्षियों के मरने पर उन्हें उठाने के लिए किसी प्रकार की सुरक्षा किट उपलब्ध नहीं कराई गई है। जिसके कारण लैंसडौन वन प्रभग के वन कर्मी बर्ड फ्लू के खतरे से सहमे हुए हैं।
43327.60 हेक्टेयर में फैले लैंसडौन वन प्रभाग के कोटद्वार, लैंसडौन, कोटड़ीडांग, दुगड्डा और लालढांग रेंज में स्वदेशी और विदेशी कई प्रजाति के सैकड़ों पक्षी आते हैं। पक्षी प्रेमी बर्ड वाचिंग के लिए लैंसडौन वन प्रभाग को बेहतर स्थान मानते हैं। ऐसे में बर्ड फ्लू को लेकर वन प्रभाग को अति संवेदनशील माना जा रहा है।
विशेषज्ञों की मानें तो बर्ड फ्लू होने पर उस क्षेत्र में जाने पर संक्रमण का खतरा रहता है। ऐसे में बर्ड फ्लू वाले स्थान पर जाने के लिए पीपीई किट और पक्षियों को उठाने के लिए विशेष प्लास्टिक बैग की आवश्यकता होती है। लेकिन, जंगल की गश्त कर रहे फील्ड कर्मचारियों को अभी तक न तो इसका प्रशिक्षण दिया गया है और ना ही उन्हें किसी प्रकार की किट उपलब्ध कराई गई है। वन कर्मी जान जोखिम में डालकर गश्त करने को मजबूर हैं।
बर्ड फ्लू को लेकर लैंसडौन वन प्रभाग में अलर्ट जारी किया गया है। कर्मचारियों के संक्रमण से सुरक्षा के लिए पीपीई किट और अन्य सुरक्षा सामान विभाग से मांगा गया है। पक्षियों के मरने पर वन कर्मियों को उनके पास नहीं जाने और इसकी जानकारी अधिकारियों को देने के निर्देश दिए गए हैं।
- दिनेश घिल्डियाल, एसडीओ लैंसडौन वन प्रभाग