उत्तराखंड आनेवाले प्रवासी पक्षियों से बर्ड फ्लू के फैलने का खतरा ज्यादा रहता है। राजधानी दून में आसन वेटलैंड, चीला बैराज में वन विभाग और पशुपालन की टीमें लगातार निरीक्षण कर रही हैं। किसी भी जगह अभी बहुत ज्यादा मामले सामने नहीं आए हैं। एक-दो कौए या अन्य पक्षियों के मरने की जानकारी सामने आ रही है। इनके सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।
दूसरे राज्यों से मुर्गियां लाने पर रोक
दूसरे राज्यों से पक्षियां लाने पर रोक लगा दी गई है। जिले में कई बड़े पोलट्री फार्म हैं, जिनके पास 35 से 40 हजार तक मुर्गियां हैं। उपचार के रूप में टेमी फ्लू का विकल्प दिया गया है। हालांकि यह बहुत ज्यादा प्रभावी नहीं है। इसलिए बीमारी को रोकने पर फोकस किया जाता है।
पक्षियों की असामान्य मौत होने पर विशेषज्ञ टीम उनकी जांच कर सैंपल भोपाल लैब भेजते हैं। रिपोर्ट में बर्डफ्लू की पुष्टि होने के बाद पूरे फॉर्म की कलिंग करनी होती है। इससे बीमारी के फैलने का खतरा कम हो जाता है। उत्तराखंड के लिहाज से अच्छा यह रहा कि कभी कलिंग नहीं करनी पड़ी। बीमारी के दौरान चिकन व अंडों की बिक्री पर असर जरूर पड़ा।
-एसबी पांडे, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी