दूसरे राज्यों में ‘फेल’ बायोमीट्रिक सिस्टम से उपभोक्ताओं को राशन देने की योजना को सरकार उत्तराखंड में लागू करने की तैयारी में है। इसके लिए लिए प्रपोजल तैयार किया जा चुका है। प्रदेश के चार जिलों के दो-दो सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता की दुकानों में ट्रायल के लिए बायोमीट्रिक मशीन लगा दी गई है। ट्रायल के बाद उपभोक्ताओं को इस व्यवस्था के माध्यम से राशन देने की योजना है। इससे करोड़ों रुपये की लागत आएगी।
सरकार सभी सेक्टरों का डिजिटलाइजेशन कर रही है। इसी क्रम में उपभोक्ताओं को बायोमीट्रिक सिस्टम के माध्यम से राशन उपलब्ध कराए जाने की योजना बनाई जा रही है। सरकार का मानना है कि ऐसा करने से फर्जीवाड़ा रुकेगा। ऐसे में बायो मैट्रिक मशीन सभी राशन डीलरों की दुकानों में लगनी है। एक मशीन की कीमत करीब 25 हजार रुपये है।
कई राज्यों में योजना हुई फेल
इस योजना को बाड़मेर, टोंक, जयपुर, जोधपुर समेत कई पहाड़ी राज्यों में लागू की गई। मगर इस नयी व्यवस्था से उपभोक्ताओं को परेशानी होनी लगी। जिस पर बाद में फिर से पुरानी व्यवस्था को लागू करना पड़ा। योजना के अनुसार उन्हीं उपभोक्ताओं को राशन मिलेगा, जिसके नाम से राशन कार्ड हैं। साथ ही, उपभोक्ता को राशन लेने जाना होगा।
ऐसे में यदि राशन कार्ड धारक मुखिया कहीं बाहर चला जाए या बीमार पड़ जाए तो उसके परिवार को राशन नहीं मिलेगा। इसके अलावा जिसके हाथ नहीं हैं, उनके लिए इसमें कोई व्यवस्था नहीं है। खासकर यह योजना ऐसे पहाड़ी क्षेत्रों के लिए सही नहीं है, जहां बिजली और नेटवर्क की समस्या है। राशन डीलर भी इस व्यवस्था का विरोध कर रहे हैं।
यह है परेशानियां
लाइट की समस्या, नेटवर्क समस्या, लोड पड़ने पर सर्वर डाउन, समय की बर्बादी
लंबी लाइन, विकलांग के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं, मशीन चोरी हुई तो राशन डीलर को देना पडे़गा हर्जाना
यह भारत सरकार की योजना है। इसमें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत प्रदेश के सभी सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता की दुकानों पर बायो मैट्रिक मशीन अनिवार्य रूप से लगाई जानी है। यदि योजना दूसरे राज्यों में फेल हो रही है तो केंद्र सरकार को इस पर सोचना है।
-राधा रतूड़ी प्रमुख सचिव खाद्य