ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने सभी बीएड कॉलेजों के लिए बायोमीट्रिक हाजिरी का नियम लागू कर दिया है। कॉलेजों को 30 दिन के भीतर बायोमीट्रिक हाजिरी व्यवस्था शुरू करनी है। एनसीटीई के इस नियम से कॉलेजों में 100 छात्रों पर 16 शिक्षकों की व्यवस्था की पोल खुलनी तय है। वहीं उत्तराखंड के बीएड कॉलेजों की एसोसिएशन ने शिक्षकों के पदों की संख्या के नियम में शिथिलता बरतने की मांग की है।
एनसीटीई के सदस्य सचिव संजय अवस्थी की ओर से जारी नोटिस के अनुसार सभी बीएड कॉलेजों को छात्र और शिक्षकों की बायोमीट्रिक हाजिरी के लिए 30 दिन के भीतर इंतजाम करना है। इसके बाद हर सप्ताह की बायोमीट्रिक हाजिरी का पूरा ब्योरा एनसीटीई को उपलब्ध कराना होगा। इसमें लापरवाही पर एनसीटीई एक्ट-1993 की धारा-17 के तहत कॉलेज की मान्यता खत्म की जा सकती है। एनसीटीई के इस नियम से बीएड कॉलेजों में हड़कंप की स्थिति है। तमाम कॉलेज ऐसे हैं जो कि 100 छात्रों पर 16 शिक्षकों के नियम केवल कागजों में पूरे रहे हैं। अब बायोमीट्रिक हाजिरी होगी तो यह कागजी खानापूर्ति नहीं चल पाएगी। खास बात यह भी है कि पिछले वर्ष एनसीटीई ने सभी शिक्षकों का आधार डाटा जमा कराया था। इस साल इस आधार डाटा के हिसाब से ही बायोमीट्रिक हाजिरी को चेक किया जाएगा तो कई कॉलेजों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
उधर, उत्तराखंड के बीएड कॉलेजों ने एनसीटीई से शिक्षकों की संख्या के नियम में शिथिलता बरतने की मांग की है। एसोसिएशन ऑफ सेल्फ फाइनेंस इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष डॉ. सुनील अग्रवाल ने बताया कि 100 छात्रों पर 16 शिक्षकों का होना कॉलेज पर आर्थिक बोझ है। इसलिए नियम में शिथिलता दी जाए और प्रति 20 छात्र एक शिक्षक का नियम लागू किया जाए। सभी कॉलेजों की ओर से यह पक्ष एनसीटीई को बता गया दिया है।