ऊधमसिंह नगर के बाजपुर में फर्जी इनवाइस के आधार पर 12 करोड़ की टैक्स चोरी का खुलासा हुआ है।
डायरेक्ट जनरल ऑफ सेंट्रल एक्साइज इंटेलीजेंस (डीजीसीईआई) की मेरठ जोन की चार टीमें बाजपुर में छापेमारी कर रही है। जांच पड़ताल में चार फर्जी कंपनियां भी सामने आई हैं। इसका मास्टर माइंड आईटीसी लेने वाली कंपनी का मालिक बताया जा रहा है। वहीं फर्जीवाड़े में एक सीए का नाम भी सामने आया है।
मेरठ जोन के डिप्टी डायरेक्टर अजय मिश्रा के नेतृत्व में डीजीसीईआई की टीम बाजपुर पहुंची। टीम ने संभल के रहने वाले कारोबारी प्रवीण रस्तोगी की कंपनी प्रवीण अरोमा प्राइवेट लिमिटेड के दफ्तर में दस्तावेजों को खंगाला। प्रवीण मेंथोल क्रिस्टल बनाने का कारोबार करते हैं और माल को चीन निर्यात करते हैं। इस कंपनी ने 12 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) लिया है। माना जा रहा है कि फर्जी कंपनियों और बिलों के आधार पर अधिकतम 18 फीसदी की दर से भी गणना की जाए तो 80-90 करोड़ का कारोबार किया गया है।
दस्तावेजों की पड़ताल में सामने आया कि कंपनी जिन फर्मों से माल खरीदती है वे फर्जी कंपनियां हैं। फर्जी इनवाइस के आधार पर माल की खरीद दिखाकर आईजीएसटी जमा किया गया और करोड़ों का खेल कर दिया गया। इन सभी कंपनियों का रजिस्ट्रेशन, रिटर्न जमा करने, खाताबही बनाने का काम सीए अजय गर्ग करते हैं। इस पर टीम ने सीए गर्ग के दफ्तर में भी छापामारी की। यहां भी कई महत्वपूर्ण दस्तावेज हाथ लगे हैं।
इसके बाद टीम ने कंपनी के गोदाम में भी छापामारी की, जहां फर्जी कंपनियों के बोर्ड भी मिल गए हैं। टीम ने प्रवीण रस्तोगी की सीड्स एंड केमिकल कंपनी में भी जांच की। टीम अब फर्जी कंपनियों और प्रोप्राइटरों की जांच में जुट गई है। फौरी तौर पर सामने आया है कि फर्जी कंपनियों के मालिक प्रवीण रस्तोगी या उसके गुर्गे हैं। उप्र से छापामारी करने आई टीम में संजय आनंद, अर्पित सक्सेना, ममता यादव, अमित तिवारी, हिमांशु चौहान, हिमांशु शर्मा शामिल थे।
इस तरह हुआ खुलासा
डिप्टी डायरेक्टर अजय मिश्रा ने बताया कि उन्होंने उप्र से रंजीत सिंह को पकड़ा था। रंजीत के पास से फर्जी इनवाइस का जखीरा पकड़ा गया था। कई कंपनियों के 300 करोड़ से ज्यादा के माल के फर्जी इनवाइस बनाए गए थे। जब इन कंपनियों की जांच हो रही थी तो कई फर्जी मालिक भी सामने आए थे। धीरे-धीरे जांच में प्रवीण अरोमा लिमिटेड का नाम सामने आया तो करोड़ों के घोटाले का पर्दाफाश हो गया।
ऐसे होता है फर्जी इनवाइस पर आईटीसी लेने का खेल
जीएसटी के नियमानुसार माल को विदेशों में निर्यात करने पर कर देयता शून्य होती है। अब कंपनी वाले फर्जी कंपनियां बना लेते हैं। इन कंपनियों पर माल नहीं होता है, सिर्फ फेक इनवाइस बनाई जाती है। चूंकि माल सिर्फ कागजों में ही खरीदा गया, इसलिए इन फर्जी इनवाइस के आधार पर आईटीसी ले लिया जाता है, लेकिन फर्जी कंपनी में इसका ब्योरा नहीं दिया जाता है। इस तरह सरकार को लाखों का चूना लगता है।
प्रवीण अरोमा कंपनी को देना होगा भारी जुर्माना
डिप्टी डायरेक्टर ने बताया कि जीएसटी में सेक्शन 74 के अंतर्गत फर्जी इनवाइस पर आईटीसी लेना जुर्म है। इसमें आईटीसी की रकम, फर्जीवाड़ा कर ली गई रकम के बराबर जुर्माना और जितने समय तक रकम का उपयोग किया गया उस अवधि का ब्याज देना होगा।
बाजपुर में प्रवीण अरोमा कंपनी में फर्जी इनवाइस पर 12 करोड़ का आईटीसी लेने का खुलासा हुआ है। प्रोप्राइटर ने भी इसे स्वीकार कर लिया है। कई फर्जी कंपनियां सामने आई हैं इन कंपनियों को सीए अजय गर्ग के जरिए रिटर्न, पंजीयन किया गया था इसलिए वहां भी जांच की गई है।
- अजय मिश्रा, डिप्टी डायरेक्टर, डायरेक्ट जनरल ऑफ सेंट्रल एक्साइज इंटेलीजेंस (डीजीसीईआई)
कारोबारी को दिया जाएगा समय
डिप्टी डायरेक्टर अजय मिश्रा ने बताया कि इस तरह के मामलों में डीजीसीईआई के अपर महानिदेशक तय करते हैं कि किस कारोबारी को टैक्स जमा करने के लिए कितना समय दिया जाना है। यह कारोबारी के व्यवहार पर डिपेंड करता है। इस मामले में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है।