सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका खारिज होने से उत्तराखंड सरकार को जोर का झटका लगा है। दरअसल प्रदेश सरकार ने सरकार ने वर्कचार्ज कर्मियों को पेंशन देने के मामले में कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय में उत्तराखंड सरकार के मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता फारुख रशीद ने याचिका खारिज होने की पुष्टि की है। सरकार की ओर से सिंचाई विभाग की ओर से अदालत में याचिका दायर की गई थी। अदालत का फैसला आने के बाद अब प्रदेश सरकार पर वर्कचार्ज कर्मियों को पेंशन देने का दबाव बढ़ गया है।
प्रदेश सरकार के लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, ग्रामीण निर्माण विभाग और पेयजल विभाग में वर्कचार्ज कर्मचारियों की तैनाती की व्यवस्था है। तैनात और सेवानिवृत्त हो चुके ऐसे कर्मचारियों की संख्या हजारों में है। नियमों में ऐसे कर्मचारियों को पेंशन देने का प्रावधान नहीं है, लेकिन वर्कचार्ज कर्मचारी पेंशन की मांग को लेकर शासन पर लगातार दबाव बना रहे हैं। मांग अनसुनी होने पर कई वर्कचार्ज कर्मी कोर्ट चले गए। पिछले वर्ष 23 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय ने हबीब खान बनाम उत्तराखंड राज्य और अन्य के मामले में प्रदेश सरकार को पहला झटका लगा। न्यायालय ने प्रदेश सरकार के सिविल सर्विस रेगुलेशन (सीएसआर) के नियम 370 को पंजाब सरकार के सीएसआर के नियम 3.17(2) के समान माना।
पंजाब सरकार के सीएसआर के नियम में कार्य प्रभारित सेवाओं को पेंशन दिए जाने का प्रावधान है। सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय में कार्य प्रभारित सेवाओं को पेंशन दिए जाने में अर्हकारी सेवाओं को जोड़ने का आदेश पारित किया। प्रदेश सरकार ने पारित निर्णय के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की। पिछले हफ्ते सर्वोच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। फैसले से प्रदेश सरकार को बड़ा झटका लगा है। फैसले को लागू करने से बचने की कोशिश में ही उसने पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी। फैसले लागू होने पर अकेले लोक निर्माण विभाग में 1500 वर्कचार्ज कर्मियों को लाभ देना पड़ेगा।