जुल्फिकार का आरोप है कि आरटीओ कर्मचारियों ने एजेंट के साथ सांठगांठ कर उसे प्रताड़ित करने के इरादे से यह फर्जीवाड़ा किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि विभागीय कर्मचारियों ने दस्तावेज जमा कराते समय जांच क्यों नहीं की? ट्रैक्टर और ट्राली का इंश्योरेंस एक ही एजेंट से कराया था। ट्रैक्टर का इंश्योरेंस फर्जी बताया गया है, जबकि ट्राली का इंश्योरेंस सही पाया गया।
दस्तावेज जमा कराने के तीन माह बाद विभाग ने उन्हें इंश्योरेंस फर्जी होने का नोटिस जारी किया। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि दोषियों को दंडित किया जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि रिश्वत के संबंध में शिकायत करने के बाद से आरटीओ आफिस उनसे नाराज है। ऐसा प्रतीत होता है कि जानबूझकर यह खेल किया गया है।
राजधानी में चल रहा है फर्जी इंश्योरेंस काखेल
शहर में एक सप्ताह में फर्जी इंश्योरेंस के दो मामले उजागर हुए हैं। ट्रैक्टर के फर्जी इंश्योरेंस के बाद उप परिवहन आयुक्त सुधांशु गर्ग ने चेकिंग के दौरान दूसरा मामला पकड़ा था। बृहस्पतिवार को एक वाहन स्वामी के पास बीमे के फर्जी दस्तावेज बरामद हुए थे। दोनों मामलों से जाहिर है कि राजधानी में इंश्योरेंस के फर्जी दस्तावेज बनाने का खेल चल रहा है। एसपी सिटी श्वेता चौबे ने बताया कि फर्जी इंश्योरेंस के नेटवर्क को ध्वस्त करने को विशेष टीम बनाई गई है।
इंश्योरेंस कराते समय बरतें सतर्कता
फर्जी इंश्योरेंस का मामला उजागर होने के बाद पुलिस ने वाहन चालकों के लिए एडवाजइरी जारी की है। पुलिस अधीक्षक नगर श्वेता चौबे ने बताया कि बीमा अधिकृत एजेंट से ही कराएं। गली-मोहल्लों में टेबल लगाकर इंश्योरेंस करने वालों से परहेज करें। संबंधित एजेंट का वेरीफि केशन करने के बाद ही इंश्योरेंस कराएं।
बड़ा हो सकता है फर्जीवाड़ा
फर्जी इंश्योरेंस प्रकरण सामने आने के बाद आरटीओ आफिस को गहनता से जांच करानी होगी। अन्य वाहनों के दस्तावेजों में भी फर्जीवाड़े से इंकार नहीं किया जा सकता है। एआरटीओ द्वारिका प्रसाद ने अधिकारियों और कर्मचारियों को वाहनों के दस्तावेजों की गहनता से जांच के निर्देश दिए हैं।