बीते मार्च में जब ऑडिट हुआ तो कुल चालान व निर्धारित जुर्माने के सापेक्ष केवल 20 लाख रुपये ही खजाने में पाए गए। ऑडिट विभाग ने प्रथमदृष्टया इसे घपला मानते हुए यातायात निदेशालय को जांच कराने के लिए पत्र लिखा। पुलिस का तर्क है कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं थी कि इस धारा में वर्तमान में 500 रुपये जुर्माना है, लिहाजा 100 रुपये के हिसाब से जुर्माना वसूला गया।
यह गफलत हो या घपला, दोनों ही सूरतों में इसकी मार पुलिस कर्मचारियों पर ही पड़ सकती है। माना जा रहा है कि यदि घपला हुआ तो अनुशासनात्मक कार्रवाई और यदि गफलत हुई तो वसूली।
ऑडिट के बाद यह बात सामने आई थी। इसका हमें पत्र भी मिला था, जिसके बाद जांच कराई जा रही है। कुछ जनपदों ने उन्हें रिपोर्ट भेज दी है, जबकि कुछ अभी शेष हैं। ऐसे में सभी की रिपोर्ट आने के बाद मिलान किया जाएगा और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
-केवल खुराना, यातायात निदेशक, उत्तराखंड