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थर्ड पार्टी सोशल ऑडिट से हुआ मनरेगा के 'महा' घपले का खुलासा

Sat, 12 Aug 2017 09:17 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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मनरेगा
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उत्तराखंड की सहसपुर व खटीमा विकास खंड की 20 पंचायतों में पहली बार किए थर्ड पार्टी सोशल ऑडिट से मनरेगा योजना में बड़ी अनियमितता का खुलासा हुआ है।
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पंचायतों का रिकॉर्ड चेक करने पर बिल बाउचर में गड़बड़ी पाई गई। बिना डेट के ही लाखों रुपये के बिल का भुगतान किया गया। मनरेगा में काम करने वाले श्रमिकों के मस्टररोल में दर्ज की गई और श्रमिकों की हाजिरी में ओवरराइटिंग की गई। दोनों ब्लाकों में चयनित पंचायतों का सोशल ऑडिट पूरा होने के बाद इसकी विस्तृत रिपोर्ट ग्राम्य विकास विभाग को सौंपी दी है।

प्रदेश में पहली बार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का पंचायतों में सोशल ऑडिट किया गया। इसमें उत्तर प्रदेश व झारखंड के वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में सहसपुर और खटीमा विकास खंड की 20 पंचायतों में मनरेगा के तहत विकास कार्यों पर खर्च की राशि का रिकॉर्ड चेक किया। इसमें बिलों के भुगतान, मस्टररोल, श्रमिकों की हाजिरी संबंधित गड़बड़ी पाई गई। 27 जुलाई से दो अगस्त तक किए सोशल ऑडिट की रिपोर्ट केंद्र सरकार को भी भेजी जाएगी। 
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मनरेगा में श्रमिकों की फर्जी हाजिरी
सहसपुर ब्लाक की लक्ष्मीपुर पंचायत के ऑडिट में पाया कि पंचायत की एक महिला और उसकी बेटी ने मनरेगा में कभी काम नहीं मांगा और न ही मजदूरी की। इसके बाद भी उनके खाते में मनरेगा की दिहाड़ी आ गई। इससे साफ है कि मनरेगा में श्रमिकों की फर्जी हाजिरी लग रही है। इसमें पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों की मिलीभगत है। 

रिखौली पंचायत में ऑडिट होने के दो दिन पहले ही कई लोगों को जॉब कार्ड वितरित किए। जॉब कार्ड धारक की फोटो नहीं लगी है। इसी पंचायत ने एक कार्य के लिए एस्टीमेंट में 300 बैग सीमेंट दिखाया और बिल 391 बैग का बनाया गया। मस्टररोल और मेजरमेंट बुक (एमबी) में भी खर्च की राशि अंतर है। 

खटीमा ब्लाक की फुलैया पंचायत में बिल पर बिना डेट के करीब 7 लाख 64 हजार रुपये का भुगतान किया गया। बिल पर अंकित सप्लायर फर्म के टिन नंबर भी सही नहीं है। बिलों की जांच में आडिट टीम ने पाया कि बिल की रसीद खुद तैयार की गई। 

गांगी पंचायत ने फॉरेस्ट लैंड पर वन विभाग द्वारा किए काम को भी मनरेगा में दिखा दिया। हाथियों के रिहायशी इलाकों में प्रवेश को रोकने के लिए वन विभाग ने ट्रेंच का निर्माण किया। जिसे पंचायत ने मनरेगा में दर्शाया है। मनरेगा का कोई भी काम वन भूमि में नहीं किया जा सकता है। 

इन पंचायतों का हुआ सोशल ऑडिट
खटीमा ब्लाक की उमरूखुर्द, भूडमहोलिया, अमाऊ, बंदिया, फुलैया, सबौरा, गांगी, दियां, सरपूड़ा, चांदा और सहसपुर ब्लाक की कोटड़ा, लक्ष्मीपुर, कारवारी ग्रांट, छरबा, रिखौली, मिसरास पट्टी, गुजराड़ा करणपुर, आरकेडिया ग्रांट, भुड्डी, अटक फार्म पंचायत में मनरेगा का सोशल ऑडिट किया है। इन सभी पंचायतों में सोशल ऑडिट टीम ने गड़बड़ी पाई है। 

27 जुलाई से दो अगस्त तक चला ऑडिट 
सहसपुर और खटीमा विकास खंड की 20 पंचायतों में 27 जुलाई से दो अगस्त तक सोशल ऑडिट किया। उत्तर प्रदेश और झारखंड राज्य के ग्राम्य विकास विभाग के दो अफसरों के नेतृत्व में टीम ने पंचायतों में जाकर सोशल ऑडिट किया। टीम ने पंचायतों का रिकॉर्ड चेक करने के साथ ही स्थानीय लोगों से संवाद कर गड़बड़ी को लेकर साक्ष्य जुटाए। 
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प्रदेश की 20 पंचायतों में मनरेगा योजना का थर्ड पार्टी सोशल ऑडिट किया। इसमें पंचायतों में कई गड़बड़ी पाई गई। सोशल ऑडिट रिपोर्ट केंद्र और राज्य सरकार को भेजी जाएगी।
- राम विलास यादव, अपर सचिव, ग्राम्य विकास विभाग
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