इसके साथ ही उन्होंने यह जानकारी दी कि भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं को कैसे बचा जा सकता है। सेमिनार को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के निदेशक डॉ. एनपीएस बिष्ट ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र के सर्वांगीण विकास एवं पर्यावरण संतुलन के लिए अंतरिक्ष आधारित सूचना तकनीकों का महत्वपूर्ण योगदान है।
कहा कि उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र प्रदेश के विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों मसलन जल, जंगल व जमीन का उपग्रहों के माध्यमों से आंकडे़ एकत्र करता है। जिसके जरिए योजनाएं बनाने में आसानी हुई है। विशिष्ट अतिथि डॉ. पुष्पेंद्र कुमार शर्मा ने जैव विविधता संरक्षण पर जोर दिया।