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Haridwar: आज हम नहीं लड़े तो कल बाहरी ताकतें करेंगी हम पर राज...मूल निवास को लेकर आंदोलन तेज करने की तैयारी

Wed, 03 Jan 2024 12:19 PM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

मूल निवास भू कानून समन्वय संघर्ष समिति की बैठक में लोगों ने कहा कि अगर आज हम अपनी जमीन के लिए नहीं लड़े तो आने वाले समय में हम लोग अल्पसंख्यक हो जाएंगे और बाहरी ताकतें हम पर राज करेंगी। हमें अपनी पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए संघर्ष करना है। यह जनांदोलन हर गांव, हर शहर में पहुंचना जरूरी है।
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हरिद्वार में हुई मूल निवास भू कानून समन्वय संघर्ष समिति की बैठक - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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मूल निवास स्वाभिमान आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने के लिए मूल निवास भू कानून समन्वय संघर्ष समिति, उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में बैठक कर विचार-विमर्श कर रही है। इसी कड़ी में संघर्ष समिति ने हरिद्वार में विभिन्न सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों, पूर्व सैनिकों, राज्य आंदोलनकारियों के लोगों के साथ बैठक कर अग्रिम रणनीति पर चर्चा की। 

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इस मौके पर समन्वय संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी और सह संयोजक लुशुन टोडरिया ने कहा कि मूल निवास स्वाभिमान आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने का अभियान जारी है। यह उत्तराखंड के हरेक मूल निवासी का आंदोलन है। आज कुछ लोग पहाड़-मैदान को आपस में बांटने के लिए षड्यंत्र कर रहे हैं।

फर्जी स्थाई निवास बनाए
पहाड़ हो या मैदान, हरेक मूल निवासी इस लड़ाई में साथ है। संविधान में मूल निवास की कट ऑफ डेट 1950 है। हम संविधान की भावना के अनुरूप ही अपने हक की बात कर रहे हैं। हमारी लड़ाई उनके खिलाफ़ है, जो अपने मूल राज्य में मूल निवास प्रमाण पत्र का लाभ ले रहे हैं और उत्तराखंड में स्थाई निवास बनाकर लाभ रहे हैं। जबकि ऐसा करना कानूनन अपराध है।
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कहा कि बड़ी संख्या में ऐसे भी लोग हैं, जिन्होंने फर्जी स्थाई निवास बनाए हैं और वे लोग यहां नौकरी कर रहे हैं। पहाड़ के साथ ही मैदान में रहने वाले लोगों का भी हक़ बाहर के लोग मार रहे हैं। मैदान के मूल निवासी इस बात को समझते हैं। 

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'हमारे संसाधनों पर बाहरी लोग डाल रहे डाका'
उन्होंने कहा कि जब तक उत्तराखंड में हिमाचल की तर्ज पर सशक्त भू कानून और मूल निवास 1950 लागू नहीं हो जाता, यह आंदोलन जारी रहेगा। यह लड़ाई हमारे अस्तित्व, अस्मिता, स्वाभिमान और अपनी सांस्कृतिक पहचान बचाने का है। हमारे संसाधनों पर बाहरी लोग डाका डाल रहे हैं। नौकरियों से लेकर जल, जंगल, जमीन पर बाहरी लोग कब्जा कर चुके हैं। हमें अपना भविष्य सुरक्षित करने के लिए इस लड़ाई को लड़ना ही होगा। 

समन्वय समिति के सदस्य और पूर्व ब्लॉक प्रमुख पोखड़ा सुरेंद्र रावत ने कहा कि आज हमारी जमीनों पर भू माफिया का कब्जा होता जा रहा है। हमारे लोग बाहर के लोगों के रिजॉर्ट में नौकर बनने के लिए मजबूर हो गए हैं। सरकार ने भू कानून इतना लचर बना दिया है, कोई भी हमारे राज्य में बेतहाशा जमीन खरीद सकता है। 

सामाजिक कार्यकर्ता तरुण व्यास, महादेव पंवार, चंद्रकिशोर लेखवार, डॉ अजय नेगी, बलवीर सिंह रावत ने कहा कि जब हमारी जमीन बचेगी, तभी हमारा ज़मीर भी बच पायेगा। जमीन बचेगी तो हमारी संस्कृति, बोली-भाषा, वेशभूषा, साहित्य और अस्मिता बच पाएगी। 

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राज्य आंदोलनकारी सतीश जोशी ने कहा कि हम सभी को एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए लड़ना है। आज हम लोग नहीं लड़े तो आने वाले समय में हम लोग अल्पसंख्यक हो जाएंगे और बाहरी ताकतें हम पर राज करेंगी। हमें अपनी पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए संघर्ष करना है। यह जनांदोलन हर गांव, हर शहर में पहुंचना जरूरी है।
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