इधर, हत्याकांड का खुलासा न होने पर मंगलवार को परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फिर फूट पड़ा। उन्होंने सितारगंज रोड से मुख्य चौराहे तक और वहां से कोतवाली होकर तहसील तक जुलूस निकाला। लोगों ने हत्याकांड का खुलासा करने और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की। इसके बाद एसडीएम कार्यालय में आक्रोशित लोगों ने धरना प्रदर्शन किया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आसपास के थानों से भी पुलिस बल बुलाया लिया गया। तहसील में एएसपी देवेंद्र पिंचा ने पुलिस जांच अधिकारी बदलने और जल्द खुलासे का आश्वासन दिया। परिजनों ने पांच सूत्री मांगपत्र सौंपकर पॉलीग्राफ टेस्ट जल्द करवाने, जांच को प्रभावित न करने, पुलिस जांच किसी इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी से कराने, कोतवाल और दो हल्का प्रभारियों के निलंबन, जरूरत पड़ने पर एसटीएफ से भी जांच की मांग उठाई। चेतावनी दी कि जल्द ही खुलासा नहीं हुआ तो आंदोलन को उग्र किया जाएगा। विधायक पुष्कर सिंह धामी ने परिजनों के साथ बातचीत के बाद उनकी बात को एएसपी के सामने रखा और जल्द खुलासा करने को कहा।
प्रदर्शन करने वालों में किशन सिंह भंडारी, श्याम सिंह परंगाई, संजू भंडारी, भगवान सिंह मेहरा, कैलाश भंडारी, पुष्कर सिंह भंडारी, आनंद सिंह, मोहन सिंह, जगत सिंह, लक्ष्मण सिंह, ललित सिंह, कुंडल सिंह, हरीश चंद्र, दीपक सिंह, मोहन सिंह, सुभाष सिंह, पार्वती देवी, भागुली देवी, जानकी देवी, भागौ देवी, शांति देवी, वंदना, पुष्पा आदि ग्रामीण थे। इसके अलावा नेताओं और जनप्रतिनिधियों में युवा कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष भुवन कापड़ी, पूर्व सैनिक संगठन अध्यक्ष कुंवर सिंह खनका, गौरव सेनानी संगठन अध्यक्ष गंभीर सिंह धामी, पूर्व ग्राम प्रधान विक्रम सिंह बुंगला, भाजपा नेता नंदन सिंह खड़ायत, हिमांशु बिष्ट, अमित पांडे, सतीश भट्ट, श्याम दत्त चौबे, दामोदर पाटनी, भगवान सिंह, भग्गू मेहरा, सुनील चंद आदि शामिल रहे।
माइक पर बोलते-बोलते बेहोश हो गई भगवान सिंह की पत्नी
तहसील परिसर में धरने के दौरान चल रही आंदोलनकारियों की सभा में वक्ताओं के साथ ही मृतक गार्ड भगवान सिंह की पत्नी पूजा ने भी संबोधन किया लेकिन उन्होंने बोलना शुरू ही किया था कि अचानक गश खाकर गिर पड़ीं। उन्हें महिलाओं ने किसी तरह संभाला।
तहसील परिसर और कक्षों में घुसे प्रदर्शनकारी
एटीएम गार्ड की हत्या का पर्दाफाश नहीं होने के विरोध में अचानक तहसील परिसर एवं कक्षों में घुसे प्रदर्शनकारियों को देख पुलिस और प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के साथ ही प्रशासन के विरोध में नारे लगाए। इस बीच, एसडीएम और तहसील कार्यालय के दरवाजे बंद कर एसडीएम निर्मला बिष्ट, सीओ एमसी बिन्जौला, तहसीलदार युसूफ अली, एसएसआई देवेंद्र गौरव काफी देर तक बाहर ही खड़े रहे। काफी देर बाद भीड़ को समझाकर बाहर निकाला जा सका।
प्रदर्शनकारी शुभम हत्याकांड और मान सिंह हत्याकांड की तर्ज पर गार्ड भगवान सिंह भंडारी की हत्या के मामले को किसी भी स्थिति में ठंडे बस्ते में नहीं जाने देने की बात कर रहे थे। बाद में एएसपी देवेंद्र सिंह पिंचा ने भी पत्रकार वार्ता में कहा कि हर घटना अलग-अलग तरह की होती है। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि भगवान सिंह भंडारी की हत्या का खुलासा जल्द ही कर दिया जाएगा।
उकसाकर भीड़ लाने के आरोप पर माहौल गरमाया
भाजपा के दो कार्यकर्ता एसडीएम कार्यालय में उस वक्त आपे से बाहर हो गए जब पुलिस ने उन पर आरोप लगाया कि वे भीड़ को उकसाकर वहां लाए हैं। भाजपा कार्यकर्ता गणेश ठकुराठी और विवेक रस्तोगी ने कहा कि हम भीड़ को शांत करने में जुटे हैं और हम पर उकसाकर भीड़ लाने के आरोप की तोहमत मढ़ रहे हैं। थोड़ी देर तक इस बात को लेकर गहमागहमी रही। बाद में बमुश्किल स्थिति सामान्य बन सकी।
भीड़ की भेंट चढ़ा तहसील दिवस
मंगलवार को होने वाला तहसील दिवस एटीएम गार्ड की हत्या के खुलासे की मांग करने वाले प्रदर्शन की भेंट चढ़ गया। करीब 11 बजे से शुरू होने वाले तहसील दिवस पर करीब आधा दर्जन से अधिक विभागों के अधिकारी तहसील सभागार में पहुंच चुके थे। तमाम फरियादी भी अपनी समस्या उठाने को तहसील सभागार के आसपास एसडीएम, तहसीलदार एवं सीओ, एसएसआई के पहुंचने की बाट जोह रहे थे। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों की भीड़ तहसील परिसर में घुस आई और हत्यारों को गिरफ्तार करो, पुलिस विरोधी नारे लगाने लगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए आखिर तहसील दिवस को स्थगित कर दिया गया।