पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने उन्हें आवंटित सरकारी आवास का किराया जमा करने संबंधी राज्य संपत्ति विभाग के नोटिस पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस संबंध में राज्य संपत्ति विभाग के सचिव को पत्र भेजा है।
पत्र में उन्होंने कहा कि वह शासन की अनुमति से 17, न्यू कैंट रोड स्थित सरकारी आवास में रह रहे थे। शासन ने जब आवास खाली करने को कहा तो उन्होंने आवास खाली भी कर दिया। ऐसे में आवास का किराया और बिजली-पानी के बिल का भुगतान करने का कोई मतलब ही नहीं बनता है।
पत्र में उन्होंने राज्य संपत्ति विभाग के तत्कालीन अपर सचिव द्वारा सात नवंबर 2008 को जारी जीओ का भी हवाला दिया है। जिसमें कहा गया है कि उनको आवंटित सरकारी आवास के बिजली और पानी के बिल का भुगतान शासन द्वारा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने तक लगातार विधानसभा के सदस्य रहे हैं। इस दौरान उनके पास विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी थी।
विभाग की ओर से उनको कैंट रोड स्थित आवास के अलावा दूसरा आवास आवंटित नहीं किया गया था। कोश्यारी ने अपने पत्र में आवास का किराया और बिजली-पानी का बिल जमा कराने संबंधी आदेश को निरस्त करने की बात कही है। राज्य संपत्ति विभाग ने 29 नवंबर 2016 को कोश्यारी सहित प्रदेश के पांच पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास का किराया जमा कराने का नोटिस भेजा था। कोश्यारी को आवास के किराये के रूप में 1.76 लाख रुपये जमा कराने को कहा गया था। उस वक्त भी कोश्यारी ने कहा था कि उनके पास किराया जमा कराने पैसे नहीं हैं।
बहुगुणा जमा करा चुके हैं किराया
राज्य संपत्ति विभाग के नोटिस के बाद पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा 39 हजार रुपये सरकारी आवास का किराया जमा करा चुके हैं, जबकि अन्य चार पूर्व मुख्यमंत्रियों ने किराया जमा नहीं कराया है। अब विभाग की ओर से इन पूर्व मुख्यमंत्रियों को रिमाइंडर भेजे जाने की तैयारी की जा रही है।
कोश्यारी, खंडूड़ी और निशंक खाली कर चुके हैं आवास
कोर्ट के आदेश के बाद राज्य संपत्ति विभाग ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास खाली करने का नोटिस भेजा था। पांच पूर्व मुख्यमंत्रियों में से भगत सिंह कोश्यारी, बीसी खंडूड़ी और रमेश पोखरियाल निशंक आवास खाली कर चुके हैं, जबकि एनडी तिवारी और विजय बहुगुणा ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र देकर कहा है कि वह 15 फरवरी 2017 तक सरकारी आवास खाली कर देंगे।