उत्तराखंड के इस गांव में स्कूल पहुंचते ही छात्राएं अजीब हरकतें कर रही हैं। डॉक्टरों को छात्राओं की यह बिमारी समझ में नहीं आ रही है।
चंपावत के जीआईसी धौन में अध्ययनरत छात्राओं के अजीब बीमारी की चपेट में आने की शिकायत पर बृहस्पतिवार को चिकित्सा दल स्कूल में जाकर छात्राओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया। छात्राओं को हो रही अजीब बीमारी चिकित्सकों की समझ में नहीं आई।
जीआईसी धौन में अध्ययनरत छात्राएं नए शिक्षा सत्र से अजीब बीमारी की चपेट में आ रही है। घर से ठीक ठाक स्कूल में पहुंचने के बाद छात्राएं कक्षाओं में अजीब हरकतें करने के साथ बेहोश हो जा रही हैं। प्रधानाचार्य जगदीश सिंह अधिकारी के अनुसार स्कूल शुरू होते ही अलग अलग कक्षाओं में छात्राओं के बेहोश होने अथवा अजीब हरकतें करने का सिलसिला शुरू हो जाता है।
बीमारी के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल पाई
चिकित्सक
छात्राओं के इस अजीब सी बीमारी की चपेट में आने से घबराए अभिभावकों ने दो दिन पहले डीएम डॉ.अहमद इकबाल को ज्ञापन सौंपकर स्कूल में चिकित्सकों की टीम भेजने की मांग उठाई थी। बृहस्पतिवार को एसीएमओ डॉ.रश्मि पंत की अगुवाई में चिकित्सा दल स्कूल में पहुंचा।
प्रारंभिक जांच में चिकित्सा दल को छात्र-छात्राओं की इस बीमारी के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल पाई। डॉ. रश्मि पंत का कहना है कि छात्राओं की बीमारी की जांच के लिए जिला अस्पताल में बुलाया गया है।
उनका कहना है कि छात्राओं में उम्र बढ़ने के साथ ही हारमोन में परिवर्तन आने के कारण भी इस तरह की घटनाएं हो सकती हैं। उनका कहना है कि अज्ञात बीमारी के बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है, अलबत्ता छात्राओं में यह लक्षण हिस्टीरिया के भी हो सकते हैं। जीआईसी धौन में बगेड़ी, बनलेख, मौराड़ी, धौन, पत्थरमौन, नायल, सांयली, सल्ली और आसपास के गांवों के बच्चे पढ़ने को जाते हैं। लेकिन अधिकांश छात्राओं के स्कूल में अज्ञात बीमारी की चपेट में आने से अभिभावकों में चिंता व्याप्त है।
चिकित्सा दल के लौटते ही करने लगी अजीब हरकतें
सदियों से चली आ रही है बलि की प्रथा
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जीआईसी धौन में जब तक चिकित्सा दल मौजूद रहा तब तक तो सब कुछ ठीक ठाक रहा। लेकिन जैसे ही चिकित्सा दल वापस चंपावत को लौटा तो स्कूल की छात्राएं फिर से अजीब हरकतें करते हुए और बेहोश होने लगी।
प्रधानाचार्य जगदीश सिंह अधिकारी के अनुसार कुछ देर अजीब हरकतें करने के बाद छात्राएं शांत भी हो जा रही है। उनका कहना है कि पर्वतीय क्षेत्र में धार्मिक मान्यताओं के कारण अभिभावक छात्राओं का इलाज कराने के बजाए झाड़ फूंक का सहारा ले रहे हैं।
बकरे और मुर्गे की बलि मांगने लगती हैं छात्राएं
जीआईसी धौन में छात्राओं के इस बीमारी से ग्रसित होने का सिलसिला बीते एक माह में काफी तेज हो गया है। स्थानीय स्तर पर देव डांगरों को बुलाने और उनके द्वारा टीका लगाने से छात्राएं शांत भी हो जाती हैं। जब छात्राएं अजीब हरकतें और बेहोश होने लगती हैं तो वह जोर जोर से बकरे और मुर्गे की बलि मांगने लगती हैं। इससे पूर्व जिले के कई अन्य स्कूलों में भी इस तरह की घटनाएं पेश आ चुकी हैं।