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Iनदी के खुल रहे कारखानों और आबादी क्षेत्र के चार गंदे नाले
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Iसर्वे और पानी की जांच से आगे नहीं बढ़ी कार्यवाहीI
अस्सी के दशक से पहले कभी क्षेत्र के लोग और पशु सेलाकुई के किनारे बहने वाली आसन नदी का पानी पीया करते थे। नदी में मछलियां भी नजर आती थीं। लेकिन आज नदी की हालत इतनी खराब है कि यहां पानी से भयंकर दुर्गंध उठती है। नदी में औद्योगिक क्षेत्र के कारखानों और आबादी क्षेत्र के गंदे नाले गिर रहे हैं।
सेलाकुई में आसन नदी आज अपने अस्तित्व के लिए जूझ रही है। आसन नदी में औद्योगिक क्षेत्र से आने वाला करीब तीन किलोमीटर लंबा बड़ा नाला मिल रहा है। इस नाले में कारखानों की केमिकल युक्त पानी आता है। जिसमें आबादी क्षेत्र के घरों से आने वाला गंदा पानी भी मिल जाता है। वहीं जमनपुर से दो और गोरखा बस्ती से एक नाला भी नदी में गिर रहा है। बारिश के समय तो शीशमबाड़ा प्लांट से बेहद गंदा पानी तक नदी में पहुंचता है।
नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी एमएल शाह ने कहा कि नदी के आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण किया जाएगा। नदी में गंदगी डालने वाले लोगों और औद्योगिक इकाइयों को नोटिस जारी करने के साथ चालान की कार्रवाई भी की जाएगी।बतादें कि जल संस्थान विभाग और प्रदूषण नियंत्रण विभाग नदी के पानी की सैंपलिंग और नालों का सर्वे भी किया था। लेकिन नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए कार्यवाही शुरू नहीं हुई।
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Iकंपनियों का गंदा पानी नाले में छोड़ा जा रहा है। यही पानी आसन नदी में मिलता है। नदी प्रदूषित हो रही है। गंदगी और बदबू से जीना मुश्किल हो रहा है। नालों का पानी ओवरफ्लो होकर सड़क पर भी बहता है। - विजय पाल सिंह, बर्तवाल, पूर्व ग्राम प्रधान
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Iआसन नदी में विभिन्न जगहों से गंदा पानी नदी में मिल रहा है। क्षेत्र के लोग गंदगी से बीमार पड़ रहे हैं। कई बार श्रमदान से नदी की सफाई भी कराई गई। लेकिन अब गंदगी इतनी बढ़ गई है कि सफाई संभव नहीं है। - अमित नेगी, पूर्व अध्यक्ष, युवक मंगल दल
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Iकुछ समय पहले एक टीम आई थी। नाले के पानी की जांच की थी। नदी में गिरने वाले नालों को भी देखा था। लेकिन उसके बाद भी कोई हल नहीं निकला। नदी के आसपास के क्षेत्रों में बदबू इतनी आती है कि सांस नहीं ली जाती है। शिकायत करें तो कहां करें कोई सुनने को तैयार नहीं है। - मोहम्मद इकबाल, जमनपुर
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Iपीसीबी लगातार जांच करती रहती है। जल संस्थान और पीसीबी ने नदी के पानी की सैंपलिंग और सर्वे भी किया था। सैंपल और सर्वे रिपोर्ट अधिकारियों को भेजी गई है। अगर औद्योगिक क्षेत्र की ओर से आने वाले नाले में केमिकल युक्त पानी छोड़ा जा रहा है तो कार्रवाई की जाएगी। कंपनियों में ट्रीटमेंट प्लांट को लेकर अभियान चलाया जाएगा। - राजकुमार चतुर्वेदी, क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्डI