चारधाम यात्रा पर गंगोत्री-यमुनोत्री आने वाले तीर्थयात्री जानकारी के अभाव में सिर्फ धाम के ही दर्शन कर पाते हैं, जबकि दोनों धाम के आसपास इसके अलावा और भी कई पौराणिक महत्वपूर्ण स्थल हैं।
पिछले कई दशकों से चारधाम यात्रा चल रही है, लेकिन गंगोत्री-यमुनोत्री में धाम के दर्शन करने के बाद बहुत कम श्रद्धालु धाम में ठहरते हैं। इसके चलते धाम में जहां दिनभर चहल-पहल रहती है, तो रात को कम तीर्थयात्री ही रहते हैं। बता दें कि गंगोत्री धाम में होटल, आश्रम, धर्मशालाओं, सरकारी व गैर सरकारी विश्रामगृहों को मिलाकर रोजाना दस हजार तक यात्रियों के ठहरने का इंतजाम है।
यमुनोत्री में बनी धर्मशालाओं में एक रात में 500 से अधिक तीर्थयात्री रुक सकते हैं। शाम को आठ बजे की गंगा आरती के बाद भी कई यात्री निचले पड़ावों की ओर लौट जाते हैं। दोनों धामों के आसपास ऐसे कई पर्यटन स्थल व पौराणिक आध्यात्मिक स्थान मौजूद हैं, जहां यात्री घूम सकते हैं।
गंगोत्री धाम से पांच सौ मीटर के दायरे में साधु की गुफाएं, पांडव गुफा, सूर्यकुंड आदि शामिल हैं, जबकि यमुनोत्री धाम से 500 मीटर आगे गरुड़ गंगा, प्राकृतिक झरने, ग्लेशियर आदि देखने लायक हैं। गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष मुकेश सेमवाल का कहना है कि तीर्थधाम में यात्रियों के ठोस योजना तैयार करने की जरूरत है।
साथ ही यहां के आध्यात्मिक व पर्यटन के महत्व स्थलों का प्रचार-प्रसार होना जरूरी है। वहीं यमुनोत्री मंदिर समिति के उपाध्यक्ष पवन प्रकाश उनियाल ने बताया कि धाम के आसपास के खूबसूरत स्थलों का प्रचार-प्रसार होना चाहिए।