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उत्तराखंड सरकार के हाथ से निकला मामला अब क्रिकेट एसोसिएशन का फैसला बीसीसीआई के हाथ

Sun, 03 Dec 2017 11:47 AM IST
अभिषेक सिंह/अमर उजाला,हल्द्वानी
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क्रिकेट लीग - फोटो : demo pic
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खेल मंत्री अरविंद पांडे मान्यता के लिए एकजुटता में बाधक बनी क्रिकेट एसोसिएशनों पर नकेल कसने की बात कर रहे हैं, लेकिन दिक्कत यह है कि अब यह मामला सरकार के हाथ से निकल गया है।
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अमर उजाला ने कई बार इस बारे में चेताया भी लेकिन तब इस ओर ध्यान हीं नहीं दिया गया। अब बहुत देर हो चुकी है, क्योंकि सुप्रीमकोर्ट ने उत्तराखंड क्रिकेट की मान्यता का मामला पूरी तरह से बीसीसीआई की क्र्रिकेट प्रशासक समिति (सीओए) के हवाले कर दिया है।

अमर उजाला काफी समय से प्रदेश के क्रिकेट खिलाड़ियों के भविष्य के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए लगातार सभी एसोसिएशनों से एक होने की बात करता रहा, लेकिन जब बात नहीं बनी तो सरकार से भी इस दिशा में पहल करने की गुजारिश की।
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इस पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रयास भी किए और मान्यता को लेकर एक बैठक भी बुला ली। लेकिन बैठक का मुद्दा सरकार में ही मौजूद कुछ लोगों और एक एसोसिएशन ने रणजी मैच की ओर मोड़ दिया।

इसी बीच एक एसोसिएशन ने मामला सुप्रीमकोर्ट में होने की बात कही। जबकि उस समय उत्तराखंड क्रिकेट से संबंधित कोई भी याचिका सुप्रीमकोर्ट के संज्ञान में नहीं थी। इसके बाद भी सरकार की ओर से कोई प्रयास नहीं किए गए। इस बीच सभी ओर से निराश होने के बाद उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन सुप्रीमकोर्ट पहुंच गई।

 

एकजुटता में बाधक एसोसिएशन पर करेंगे कार्रवाई

बीसीसीआई स्पॉन्सर से जुड़ा सदस्य
 तीन न्यायाधीशों की पीठ ने मान्यता का मामला सीओए के हवाले कर दिया। सुप्रीमकोर्ट में मामला जाने के बाद अगर सरकार के हाथ में कुछ होता तो बिहार में क्रिकेट एसोसिएशन का विवाद तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव और वर्तमान मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने कब का सुलझा दिया होता।

इधर खेल मंत्री कह रहे हैं कि एकजुटता में बाधक एसोसिएशन पर कार्रवाई करेंगे। प्रदेश में कार्यरत चार प्रमुख एसोसिएशन में से तीन जहां सोसाइटी एक्ट में पंजीकृत हैं, वहीं एक उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन (यूसीए) कंपनी लॉ के तहत पंजीकृत है। ऐसे में सवाल उठता है कि उस पर खेल मंत्री जी किस स्तर पर जाकर कार्रवाई करेंगे।

 किसी तरह का दबाव डालने पर अन्य तीन एसोसिएशन कोर्ट जा सकती है तब सरकार की फजीहत निश्चित है। हालांकि यूसीए के कर्ताधर्ता दिव्य नौटियाल का कहना है कि जहां तक एक दूसरे से मिलने की बात है तो कंपनी का विलय सोसाइटी में नहीं हो सकता है। कंपनी में सोसाइटियों का विलय हो सकता है। क्रिकेट की बेहतरी के लिए हमारी बाहें खुली हैं, जो हमसे मिलना चाहे हम तैयार हैं।

 
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एक मंच पर न आने वाली एसोसिएशन को किनारे करेगी सरकार

arvind panday
राज्य को बीसीसीआई की मान्यता के मामले में राज्य सरकार पहली बार सख्ती बरतने जा रही है। राज्य सरकार खुद मान्यता के लिए प्रयास करेगी। इसमें एकजुटता से इनकार करने वाली एसोसिएशन को शामिल नहीं किया जाएगा।

खेल मंत्री अरविंद पांडेय ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि क्रिकेट एसोसिएशन के नाम पर राज्य के युवा खिलाड़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़  करने वालों को मनमानी की छूट नहीं दी जाएगी।

उन्होंने बताया कि कुछ समय पूर्व मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सभी एसोसिएशन के पदाधिकारियों से साथ बातचीत की गई है। इसमें सभी एसोसिएशन से एक मंच पर आकर मान्यता के लिए प्रयास करने का फैसला लिया गया है, लेकिन एक एसोसिएशन के स्तर से इसमें असहयोग की बात सामने आ रही है।

इससे राज्य के खिलाड़ियों को नुकसान झेलना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य के कई खिलाड़ियों ने एसोसिएशन के मनमाने रवैये की शिकायत की है। जांच में ऐसे आरोपों की पुष्टि भी हुई है।

राज्य सरकार ऐसी एसोसिएशन और उनके पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी कर सकती है। उन्होंने कहा कि फिलहाल वह खिलाड़ियों के भविष्य और मान्यता को देखते हुए चुप हैं, लेकिन अगर किसी ने मान्यता के मामले में पेंच फंसाने का प्रयास किया तो वह उनके खिलाफ किसी भी स्तर पर जाकर कार्रवाई करने को तैयार हैं।
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