बीते ढाई साल में उत्तराखंड क्रिकेट के हक में लगातार तीन बड़े फैसले हुए हैं। इनसे सीधे-सीधे प्रदेश की क्रिकेट प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलेगा। सबसे पहले उत्तराखंड की क्रिकेट टीम को बीसीसीआई से मान्यता मिली।
कुछ ही महीने पहले वर्षों से मान्यता पर लटका फैसला भी सुलझा और सीएयू को क्रिकेट संचालन की जिम्मेदारी मिली। अब बीसीसीआई में उपाध्यक्ष के रूप में बड़ी जिम्मेदारी मिलने से साफ है कि प्रदेश के हक में फैसले हो सकेंगे।
उम्मीदों पर खरे उतरे हैं महिम
देहरादून में पहली बार विजय हजारे ट्रॉफी की मेजबानी करने जा रही क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (सीएयू) का प्रदर्शन अभी तक संतोषजनक रहा है। बीसीसीआई के कार्यवाहक अध्यक्ष सीके खन्ना भी महिम वर्मा के कार्यों को अच्छा बता चुके हैं। अनुभव की कमी के बावजूद मेहनत एवं समर्पण भाव से महिम ने अपनी क्षमताओं से सभी को प्रभावित भी किया है।
महिम के पिता पीसी वर्मा सीडीए एयरफोर्स में कार्यरत रहे। वे सेवा के दौरान भी क्रिकेट से जुड़े रहे। पिछले 40 वर्षों से उन्होंने क्रिकेट को प्रोत्साहन देने के लिए काम करना शुरू किया। उनकी ओर से गोल्ड कप के रूप में सबसे बड़ा एवं सफल क्रिकेट टूर्नामेंट का पिछले 37 वर्षों से आयोजन होता आया है।
उन्होंने क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड को मान्यता दिलाने व क्रिकेट के भविष्य के लिए भी संघर्ष किया। वहीं, महिम वर्मा उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में कार्यरत रहे हैं।
नौकरी के साथ उनकी क्रिकेट गतिविधियां, उनकी पृष्ठभूमि शिक्षा के क्षेत्र से रही है। पीसी वर्मा की विरासत के उत्तराधिकारी के रूप में उन्हें सीएयू में सचिव पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई।