कैमाड़ा जंगल में चल रहे दो दिवसीय जखोली मेले का मंगलवार को समापन हो गया। मेले में दूरदराज से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। दो दिन तक लोक नृत्य का सिलसिला चला। महाराज की आराधना की गई। दोपहर 2.30 बजे बाशिक महाराज की पालकी ने कैमाड़ा जंगल से बागी के लिए प्रस्थान किया।
कैमाड़ा जंगल में जखोली मेले की धूम रही। महिलाओं ने तांदी, झेंता, रासो और हारुल नृत्यों से समां बांध दिया। करीब एक घंटे तक महाराज के सामने पांडवों का पश्वा ढोल और रणसिंघा की थाप पर नृत्य चलता रहा। शाम चार बजे महाराज की पालकी बागी पहुंची। वहां श्रद्धालुओं को महाराज का भव्य स्वागत किया। बागी गांव में रात्रि प्रवास के बाद पालकी पांच जून को ग्राम फनार के लिए प्रस्थान करेगी।