दस लाख से ऊपर एनपीए मामलों पर सुनवाई के लिए अब लखनऊ के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने देहरादून में ऋण वसूली अभिकरण (डेबट्स रिकवरी ट्रिब्यूनल या डीआरटी) खोल दिया है। यहां अधिकारियों की तैनाती भी कर दी गई है। न केवल बैंक बल्कि लोन मामलों पर बैंक के उत्पीड़न के शिकार ग्राहक भी यहां अपील कर सकते हैं।
उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का पूरा क्षेत्र डीआरटी के लखनऊ कार्यालय के अधीन आता था। हाल ही में वित्त मंत्रालय ने लखनऊ से अलग कर उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए डीआरटी का कार्यालय देहरादून में खोला है। माजरा स्थित कांप्लेक्स में खुले कार्यालय में बतौर ऑफिसर शमी खान समेत कई कर्मचारियों की तैनाती की गई है।
जल्द ही कार्यालय के कार्यक्षेत्र का नोटिफिकेशन जारी हो जाएगा। शमी खान ने बताया कि दस लाख रुपये से ऊपर के एनपीए मामलों पर बैंक अब लखनऊ के बजाए यहीं अपील कर सकेंगे। इसके अलावा अगर कोई ग्राहक बैंक से परेशान है तो भले ही दो लाख रुपये का लोन हो, वह भी ट्रिब्यूनल में सीधे अपील कर सकता है।
यह है ऋण वसूली अभिकरण
बैंक जो लोन बांटते हैं, अगर वह सही समय पर अदा न हो तो बैंक उसे नोन परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) में शामिल कर लेते हैं। दस लाख रुपये से कम तक के एनपीए केस तो सिविल कोर्ट में सुने जाते हैं, लेकिन दस लाख या इससे ऊपर के मामले रिकवरी के लिए ऋण वसूली अभिकरण में सुने जाते हैं।
यहां भी कोर्ट की तरह ही सुनवाई होती है, जिस पर अभिकरण (ट्रिब्यूनल) फैसला लेती है। ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद सीधे हाईकोर्ट में ही अपील का मौका मिलता है। इसके अलावा अगर बैंक किसी ग्राहक के विरुद्ध लोन मामलों पर कार्रवाई करता है तो उसके खिलाफ भी ट्रिब्यूनल में अपील दायर की जा सकती है।