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उत्तराखंड में पानी के अंधाधुंध दोहन पर लगेगा प्रतिबंध 

Sun, 21 May 2017 09:27 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : demo pic
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प्रदेश में अब भूमिगत जल का अंधाधुंध दोहन नहीं हो सकेगा। जल नीति में इस पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई है। यह व्यवस्था इसलिए की गई है कि प्रदेश के कई जनपदों में भूमिगत जल का स्तर लगातार नीचे जा रहा है।
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भूमिगत जल का व्यावसायिक इस्तेमाल भी किया जा रहा है। नई नीति में भूमिगत जल के स्तर को बढ़ाने के लिए रिचार्जिंग पर जोर दिया गया है। सिंचाई विभाग ने जल नीति का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। मंजूरी के लिए इसे जल्द ही कैबिनेट की बैठक में लाया जाएगा।

केंद्र सरकार ने 2012 में राष्ट्रीय जल नीति बनाने के बाद सभी राज्य सरकारों को अपनी-अपनी जल नीति बनाने का निर्देश दिया था। केंद्र के निर्देश पर कई राज्यों ने अपनी जल नीति तैयार कर ली है।
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उत्तराखंड में भी जल नीति बनाने पर पिछले कई माह से मंथन चल रहा है। सिंचाई विभाग ने जल नीति का ड्राफ्ट तैयार करने के बाद संबंधित विभागों से इस पर सुझाव मांगे थे। कई विभागों ने इसको लेकर अपने सुझाव भी दे दिए हैं। सुझावों को शामिल करते हुए नई जल नीति के ड्राफ्ट को अंतिम रूप दे दिया गया है। 

जल नीति में वाटर राइट्स की व्यवस्था 
पानी के इस्तेमाल करने का हक सबसे पहले किसका है, इसकी व्यवस्था जल नीति में की गई है। नीति में पहली प्राथमिकता स्वच्छ पेयजल के लिए पानी इस्तेमाल कराना है। इसके बाद पानी का इस्तेमाल सिंचाई, फिर हाइड्रो पावर, फिर पर्यावरण, कृषि पर आधारित उद्योग के लिए किया जाएगा।

इसके बाद पानी का इस्तेमाल अन्य यूजर्स कर सकेंगे। नई नीति में नगर निकायों को पानी पर लगने वाले टैक्स को संशोधित करने का भी सुझाव दिया गया है। नीति में भूमिगत जल के साथ नदियों के पानी और अन्य स्रोतों से प्राप्त होने वाले पानी के इस्तेमाल को लेकर सुझाव दिए गए हैं। 

नई जल नीति का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। इसमें पानी के इस्तेमाल को लेकर गाइड लाइन निर्धारित किए गए हैं। जल नीति का ड्राफ्ट जल्द ही मंजूरी के लिए कैबिनेट की मीटिंग में लाया जाएगा। 
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- आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव सिंचाई 
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