उत्तराखंड में किसानों के अच्छे दिन आने में अभी समय लगेगा। आलम यह है कि राज्य की लघु सिंचाई की छह हजार करोड़ की परियोजनाएं केंद्र में फंस गई है।
इससे राज्य में लघु सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण अधर में लटक गया है। एक्सीलेरेटेड इरीगेशन बेनिफिट प्रोग्राम (एआइडीपी) के तहत केंद्र सरकार ने योजना के पहले चरण में 222.05 करोड़ की धनराशि तो जारी की लेकिन पिछले डेढ़ साल से सरकार ने राज्य सरकार को इस मद में फूटी कौड़ी नही दी है।
राज्य के मैदानी जिलों हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर व देहरादून के अलावा पहाड़ी इलाकों में लघु सिंचाई के तहत नहरों, गूल, चेकडैम, हाइडैम आदि का निर्माण होना है। योजना के तहत वर्ष 2012 में 541 करोड़ की लागत से छह हजार छोटी बड़ी योजनाएं बनाई गईं। केंद्र सरकार ने योजनाओं को मंजूरी देते हुए 222.05 करोड़ का बजट भी स्वीकृत कर दिया।
निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया गया। कई योजनाएं तो पूरी कर ली गईं जबकि ज्यादातर योजनाएं बजट के अभाव में लटक गई हैं। लघु सिंचाई विभागाध्यक्ष मोहम्मद उमर ने बताया कि केंद्र सरकार को 222.05 करोड़ का उपयोगिता प्रमाण पत्र भी भेज दिया गया है।
लेकिन इसके बावजूद अभी तक दूसरी किश्त जारी नही की गई है। ऐसा नही होने से निर्माण कार्यों पर रोक लग गई है। इन निर्माण कार्यों के पूरे होने से 41 हजार हेक्टेयर में फसलों की सिंचाई होगी।