देहरादून। रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) ने मैसर्स अनिरुद्ध लैंड प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के आरकेडिया ग्रीन्स हाउसिंग प्रोजेक्ट की जमीन को बेचने पर रोक लगा दी है। दो निदेशकों द्वारा जमीन का एक हिस्सा दिल्ली निवासी ग्राहक को बेचने पर रेरा ने यह कार्रवाई की है। इससे परियोजना के ग्राहकों (आवंटियों) के हित प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी।
मौजा तरला नागल, परगना परवादून में इस परियोजना का निर्माण किया जा रहा है। निर्माणकर्ता कंपनी के निदेशक शाश्वत गर्ग ने 23 सितंबर को रेरा में शिकायती पत्र दिया था। जिसमें उन्होंने बताया कि कंपनी के दो अन्य निदेशक राजनारायण और विजय सिंह ने कुछ प्लॉटों की बिक्री के लिए बोर्ड में पारित दो प्रस्तावों से नीतीश कुमार को अधिकृत किया, जिन्होंने दिल्ली निवासी एक ग्राहक को 63 लाख रुपये में 551 वर्ग मीटर जमीन बेच दी है। उन्होंने बताया कि परियोजना के तहत कुल 172 फ्लैटों का निर्माण होना है, जिनमें से 41 आवंटित भी हो चुके हैं।
एमडीडीए ने 16 जनवरी 2017 को परियोजना का नक्शा पास किया, जिसे 20 दिसंबर 2018 को दोबारा को रिवाइज किया गया। शाश्वत गर्ग ने आशंका जताई कि परियोजना की भूमि अवैध तरीके से बेचने पर आवंटियों के हित प्रभावित हो रहे हैं। इस पर रेरा ने कहा कि परियोजना ग्रुप हाउसिंग के रूप में पंजीकृत है। उसकी भूमि की बिक्री इस प्रकार नहीं की जा सकती। इससे परियोजना में खुले क्षेत्र, हरे क्षेत्र समेत अन्य सुविधाओं के लिए जगह कम हो सकती है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में बिक्री और आवंटन के समय जो सुविधाएं देने की बात की गई थी, वो देनी ही होंगी।
रेरा के अध्यक्ष विष्णु कुमार ने कंपनी के निदेशक राजनारायण, विजय सिंह और अधिकृत नीतीश कुमार को परियोजना से संबंधित भूमि की बिक्री न करने का आदेश दिया। उन्होंने 24 अक्तूबर तक इस मामले में तीनों निदेशकों के संयुक्त हस्ताक्षर से परियोजना की प्रगति रिपोर्ट भी सौंपने को कहा है।