उत्तराखंड के सैकड़ों दुर्गम गांवों में इंटरनेट और मोबाइल सेवा को दुरुस्त करने के मकसद से बैलून सेवा का ट्रायल शुक्रवार से शुरू हो गया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत आईटीडीए सभागार में इसका उद्घाटन किया।
सीएम ने कहा कि इस बैलून से सेवा से पहाड़ी इलाकों को फायदा होगा। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की मदद से उत्तराखंड इंफॉरमेशन टेक्नोलॉजी डेवलेपमेंट एजेंसी (आईटीडीए) बैलून तकनीक का सहारा लेने जा रही है। प्रदेश में 16,870 गांवों में से 680 गांव ऐसे हैं, जहां मोबाइल-इंटरनेट की पहुंच अभी तक नहीं है।
इसमें से अधिकतर गांव और दुर्गम क्षेत्र में हैं, जहां दूर संचार लाइन बिछाना, टावर लगाने से लेकर दूसरे काम करना बेहद मुश्किल हैं। इस सुविधा के तहत 50 मीटर अधिकतम ऊंचाई तक जाने वाले बैलून पर सिग्नल देने के लिए एक एंटीना लगा होगा। एंटीना तार के माध्यम से जमीन पर लगे बेस स्टेशन (कंट्रोल पैनल समेत सभी उपकरण) से जुड़ा होगा।
सिग्नल ऑन होते ही बैलून के माध्यम से 20 से 45 किमी की परिधि में आने वाले क्षेत्र में मोबाइल फोन और इंटरनेट की सुविधा शुरू हो जाएगी। बस उपभोक्ता को अपने मोबाइल का डेटा पैक ऑन करना होगा।
यह सुविधा राज्य के सुदूरवर्ती और सीमांत क्षेत्रों में संचार सुविधाएं दुरुस्त करने के लिए बहुत मददगार साबित होगी। यह सामान्य परिस्थितियों के अलावा आपदा के वक्त मदद पहुंचाने की दिशा में भी कारगर सिद्ध होगी। उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां बैलून तकनीक का ट्रायल किया गया है।
- त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री