आचार्य बालकृष्ण के नेपाल किसी कार्यक्रम में जाने मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने उन्हें 25 फरवरी से 2 मार्च 2015 तक नेपाल जाने की इजाजत दे दी।
साथ ही न्यायालय ने उन्हें आदेशित किया है कि वह 3 मार्च, 2015 को सीबीआई देहरादून की अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अपनी वापसी की सूचना दें। पूर्व में बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट लेने के आरोप में सीबीआई ने पासपोर्ट अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।
मामले में बालकृष्ण ने अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए याचिका दायर की थी। जिस पर कोर्ट ने आचार्य बालकृष्ण को राहत देते हुए आदेश पारित किया था कि बालकृष्ण को सीबीआई को सहयोग करना होगा और उनका पासपोर्ट हाईकोर्ट में ही जमा रहेगा। कहीं बाहर जाना होगा तो उन्हें हाईकोर्ट से अनुमति लेनी होगी।
न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। आचार्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उन्हें नेपाल किसी कार्यक्रम में भाग लेने के लिए जाना है इसलिए उनका पासपोर्ट रिलीज किया जाए।
सीबीआई ने इस पर आपत्ति दर्ज कर कहा था कि यदि पासपोर्ट रिलीज किया जाता है तो वह नेपाल से बाहर कहीं भी जा सकते हैं, नेपाल जाने के लिए पासपोर्ट की आवश्यकता नहीं होती है। पक्षों की सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने पासपोर्ट तो रिलीज नहीं किया लेकिन आचार्य बालकृष्ण को 25 फरवरी से 2 मार्च 2015 तक नेपाल जाने की इजाजत दे दी।