इन पर एनएच 74 के मुआवजा निर्धारण में वित्तीय अनियमितता, भूमि के अभिलेखों में हेराफेरी, राजस्व हानि और सरकारी धन का दुरुपयोग करने के आरोप थे। जांच में तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कानूनगो, पथरी लेखपाल, चकबंदी अधिकारी, सहायक चकबंदी अधिकारी, चकबंदी अधिकारी, लेखपाल और अन्य दोषी पाए गए थे। निचली अदालत ने सभी आरोपियों के जमानत प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया था।
इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल किए थे। कोर्ट ने डीपी सिंह, विकास कुमार, चरन सिंह, भगत सिंह फोनिया, विकास चौहान उर्फ विकास कुमार, अनिल कुमार शुक्ला आदि की जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए एक नवंबर की तिथि नियत की।