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बदरीनाथ चढ़ावा हेराफेरी: पहली बार हुई गड़बड़ी या पहले से चल रहा था खेल?, 40 दिन की CCTV फुटेज से होगा खुलासा

Tue, 07 Jul 2026 05:00 AM IST
Alka Tyagi प्रमोद सेमवाल, अमर उजाला, गोपेश्वर

सार

बदरीनाथ धाम में चढ़ावा फेरीफेरी मामले के बाद अब मंदिर परिसर में उपलब्ध 40 दिन की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखी गई है। जांच टीम एक-एक फुटेज का बारीकी से परीक्षण कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं पहले भी चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी तो नहीं हुई और यदि हुई तो उसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
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बदरीनाथ धाम में हेरफेर का मामला - फोटो : अमर उजाला GFX
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विस्तार
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बदरीनाथ मंदिर में दान और चढ़ावे की रकम में कथित हेराफेरी के मामले की जांच अब 40 दिन की सीसीटीवी फुटेज तक पहुंच गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दो जुलाई को सामने आई घटना पहली बार हुई थी या इससे पहले भी चढ़ावे की गणना के दौरान इसी तरह की गड़बड़ी की जाती रही है। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि आरोपी कर्मचारी अकेले इस मामले में शामिल था या किसी अन्य व्यक्ति ने भी उसका सहयोग किया।

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बदरीनाथ धाम में दान और चढ़ावे की गणना के लिए बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की ओर से अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है। इस वर्ष गठित टीम में आरोपी अधिकारी भी शामिल था। ऐसे में जांच का दायरा केवल दो जुलाई की घटना तक सीमित नहीं रखा गया है। जांच टीम पूर्व में हुई दान गणनाओं के दौरान की गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही है। सूत्रों के अनुसार, मंदिर परिसर में उपलब्ध 40 दिन की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखी गई है। जांच टीम एक-एक फुटेज का बारीकी से परीक्षण कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं पहले भी चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी तो नहीं हुई और यदि हुई तो उसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

हर पहलू की होगी जांच
सीईओ बीकेटीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि चढ़ावे की गणना स्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों की 40 दिन की फुटेज सुरक्षित रखी गई है। जांच के दौरान इन सभी फुटेज का परीक्षण किया जाएगा। यदि किसी अन्य दिन भी किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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बदरीनाथ चढ़ावा मामला: BKTC की कार्रवाई, ड्यूटी से गायब और बिना ड्यूटी गणना कक्ष में मिले कर्मियों को नोटिस

आरोपी अधिकारी को पहली बार मिली थी अहम जिम्मेदारी

मामले में आरोपी अधिकारी की नियुक्ति और जिम्मेदारियों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। वर्ष 2003 में उसे इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के पद पर अस्थायी नियुक्ति मिली थी। वर्ष 2012 में शासन ने बीकेटीसी में 34 पदों को स्वीकृति दी, जिनमें यह पद भी शामिल था। वर्ष 2014 में बोर्ड बैठक के निर्णय के बाद उसे इसी पद पर स्थायी कर दिया गया। बाद में वर्ष 2017 में उसे बीकेटीसी अध्यक्ष के निजी सचिव के रूप में जिम्मेदारी दी गई। वर्ष 2026 में पहली बार बदरीनाथ मंदिर में तैनाती दी गई, जहां उसे दो महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं। इनमें थाली भेंट गणना यानी दान-चढ़ावे की गणना और प्रोटोकॉल नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी शामिल थी। वीआईपी दर्शन और प्रोटोकॉल व्यवस्था की जिम्मेदारी भी उसी के पास थी। बदरीनाथ में पहली तैनाती के दौरान ही वह चढ़ावे की रकम में हेराफेरी के आरोप लगे हैं।

सेवानिवृत्ति के बाद नई नियुक्ति न होने पर भी उठ रहे सवाल

दान-चढ़ावे की गणना के लिए नियुक्त छह सदस्यीय टीम में नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी प्रभारी अधिकारी और सब-नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी मंदिर अधिकारी के पास थी। दोनों अधिकारी 30 जून को सेवानिवृत्त हो गए थे। इसके बावजूद उनकी जगह किसी अन्य अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई। ऐसे में दो जुलाई को हुई दान गणना के दौरान आरोपी अधिकारी की भूमिका सबसे प्रमुख मानी जा रही है।
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दान की प्रत्येक वस्तु का रखा जाता है पूरा रिकॉर्ड

मंदिर में प्राप्त दान की गणना एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाती है। सबसे पहले सोना और चांदी अलग किए जाते हैं, इसके बाद नकदी की गणना होती है। यदि सोना-चांदी की मात्रा अधिक होती है तो उसकी जांच के लिए सोनार को बुलाया जाता है। नकदी को खजांची की मौजूदगी में बैंक कर्मियों को सौंपा जाता है और उसकी रसीद ली जाती है। सोना-चांदी को अलग पोटलियों में सुरक्षित रखा जाता है। प्रत्येक पोटली पर तारीख और उसके भीतर रखी सामग्री का पूरा विवरण दर्ज किया जाता है, जिससे रिकॉर्ड सुरक्षित बना रहे।
 

सीसीटीवी फुटेज पर टिकी है पूरी जांच

मामले की जांच का सबसे महत्वपूर्ण आधार सीसीटीवी फुटेज को माना जा रहा है। बदरीनाथ मंदिर परिसर में एक जुलाई से हाई-रेजोल्यूशन कैमरे लगाए जाने शुरू हुए थे और अगले ही दिन कथित हेराफेरी का मामला सामने आ गया। मंदिर परिसर में कुल 32 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। बताया जा रहा है कि एक कैमरे की फुटेज में आरोपी कर्मचारी मोबाइल फोन के साथ कुछ संदिग्ध वस्तु लेते हुए दिखाई दिया है। जांच टीम पुराने और नए दोनों प्रकार के कैमरों की रिकॉर्डिंग की पड़ताल कर रही है, ताकि घटना की वास्तविकता सामने आने के साथ यह भी स्पष्ट हो सके कि कहीं इस तरह की गतिविधियां पहले से तो नहीं चल रही थीं। मंदिर परिसर में कुल 32 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। बताया जा रहा है कि एक कैमरे की फुटेज में आरोपी कर्मचारी मोबाइल फोन के साथ कुछ संदिग्ध वस्तु लेते हुए दिखाई दिया है। जांच टीम पुराने और नए दोनों प्रकार के कैमरों की रिकॉर्डिंग की पड़ताल कर रही है, ताकि घटना की वास्तविकता सामने आने के साथ यह भी स्पष्ट हो सके कि कहीं इस तरह की गतिविधियां पहले से तो नहीं चल रही थीं।

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