आरोपी अधिकारी को पहली बार मिली थी अहम जिम्मेदारी
मामले में आरोपी अधिकारी की नियुक्ति और जिम्मेदारियों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। वर्ष 2003 में उसे इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के पद पर अस्थायी नियुक्ति मिली थी। वर्ष 2012 में शासन ने बीकेटीसी में 34 पदों को स्वीकृति दी, जिनमें यह पद भी शामिल था। वर्ष 2014 में बोर्ड बैठक के निर्णय के बाद उसे इसी पद पर स्थायी कर दिया गया। बाद में वर्ष 2017 में उसे बीकेटीसी अध्यक्ष के निजी सचिव के रूप में जिम्मेदारी दी गई। वर्ष 2026 में पहली बार बदरीनाथ मंदिर में तैनाती दी गई, जहां उसे दो महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं। इनमें थाली भेंट गणना यानी दान-चढ़ावे की गणना और प्रोटोकॉल नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी शामिल थी। वीआईपी दर्शन और प्रोटोकॉल व्यवस्था की जिम्मेदारी भी उसी के पास थी। बदरीनाथ में पहली तैनाती के दौरान ही वह चढ़ावे की रकम में हेराफेरी के आरोप लगे हैं।
सेवानिवृत्ति के बाद नई नियुक्ति न होने पर भी उठ रहे सवाल
दान-चढ़ावे की गणना के लिए नियुक्त छह सदस्यीय टीम में नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी प्रभारी अधिकारी और सब-नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी मंदिर अधिकारी के पास थी। दोनों अधिकारी 30 जून को सेवानिवृत्त हो गए थे। इसके बावजूद उनकी जगह किसी अन्य अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई। ऐसे में दो जुलाई को हुई दान गणना के दौरान आरोपी अधिकारी की भूमिका सबसे प्रमुख मानी जा रही है।
दान की प्रत्येक वस्तु का रखा जाता है पूरा रिकॉर्ड
मंदिर में प्राप्त दान की गणना एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाती है। सबसे पहले सोना और चांदी अलग किए जाते हैं, इसके बाद नकदी की गणना होती है। यदि सोना-चांदी की मात्रा अधिक होती है तो उसकी जांच के लिए सोनार को बुलाया जाता है। नकदी को खजांची की मौजूदगी में बैंक कर्मियों को सौंपा जाता है और उसकी रसीद ली जाती है। सोना-चांदी को अलग पोटलियों में सुरक्षित रखा जाता है। प्रत्येक पोटली पर तारीख और उसके भीतर रखी सामग्री का पूरा विवरण दर्ज किया जाता है, जिससे रिकॉर्ड सुरक्षित बना रहे।
सीसीटीवी फुटेज पर टिकी है पूरी जांच
मामले की जांच का सबसे महत्वपूर्ण आधार सीसीटीवी फुटेज को माना जा रहा है। बदरीनाथ मंदिर परिसर में एक जुलाई से हाई-रेजोल्यूशन कैमरे लगाए जाने शुरू हुए थे और अगले ही दिन कथित हेराफेरी का मामला सामने आ गया। मंदिर परिसर में कुल 32 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। बताया जा रहा है कि एक कैमरे की फुटेज में आरोपी कर्मचारी मोबाइल फोन के साथ कुछ संदिग्ध वस्तु लेते हुए दिखाई दिया है। जांच टीम पुराने और नए दोनों प्रकार के कैमरों की रिकॉर्डिंग की पड़ताल कर रही है, ताकि घटना की वास्तविकता सामने आने के साथ यह भी स्पष्ट हो सके कि कहीं इस तरह की गतिविधियां पहले से तो नहीं चल रही थीं। मंदिर परिसर में कुल 32 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। बताया जा रहा है कि एक कैमरे की फुटेज में आरोपी कर्मचारी मोबाइल फोन के साथ कुछ संदिग्ध वस्तु लेते हुए दिखाई दिया है। जांच टीम पुराने और नए दोनों प्रकार के कैमरों की रिकॉर्डिंग की पड़ताल कर रही है, ताकि घटना की वास्तविकता सामने आने के साथ यह भी स्पष्ट हो सके कि कहीं इस तरह की गतिविधियां पहले से तो नहीं चल रही थीं।