फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चारधाम यात्रा पर मंडरा रही आपदा की ‘प्रेतछाया’

Wed, 19 Feb 2014 12:24 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
पिछले साल हजारों की जान लेने वाली बदरी-केदारघाटी को आपदा की ‘प्रेतछाया’ से मुक्ति मिलती नजर नहीं आ रही।
विज्ञापन


चारधाम की यात्रा कर पुण्यलाभ कमाने की लालसा लिए हर साल फरवरी के दूसरे पखवाड़े तक हजारों तीर्थयात्री चारधाम यात्रा मार्ग पर स्थित होटल, अतिथिगृहों, धर्मशालाओं में अपनी बुकिंग करा लेते थे।

इस साल स्थिति बिलकुल विपरीत है। अभी तक जीरो बुकिंग है। इक्के-दुक्के तीर्थयात्री बुकिंग के बारे में पूछ तो रहे हैं मगर पिछले साल की आपदा में तबाह हुए यात्रामार्ग का हाल सुनकर बिदक जा रहे हैं।
विज्ञापन


पढ़ें, बदरीनाथ रावल के खिलाफ डटी है पीड़िता

अगर यात्रा सीजन चौपट हुआ तो उत्तरकाशी में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से यात्रा पर टिकी करीब 25 हजार परिवारों की आजीविका चौपट हो जाएगी।

पढ़ें, उत्तराखंड में बर्फबारी ने तोड़ा 33 सालों का रिकॉर्ड

राज्य के मुख्यमंत्री हरीश रावत कहते हैं कि चारधाम यात्रा शुरू करवाना सरकार की प्रतिष्ठा से जुड़ा है, इसे हर हाल में शुरू करवाया जाएगा। लेकिन जब तक तैयारियां पूरी होंगी तब तक नुकसान हो चुका होगा।

अभी तक न होटल बुक हुए, न ही अतिथिगृह

हर साल चारधाम यात्रा के लिए फरवरी तक काफी बुकिंग हो जाती थी लेकिन इस बार अभी बुकिंग शुरू नहीं हुई है। इस साल बुकिंग शून्य है।

पढ़ें, फैक्ट्री में धमाकों से दहली रुड़की

होटल एसोसिएशन उत्तरकाशी के अध्यक्ष अजय पुरी कहते हैं कि चारधाम के यात्री दीपावली से पहले ही बुकिंग शुरू करा देते थे। अब तक तो यात्रा सीजन के शुरुआती दो माह के लिए होटल बुक भी हो जाते थे। इस बार अभी तक टूर ऑपरेटर्स ने कोई बुकिंग नहीं कराई है।

एक भी एडवांस बुकिंग नहीं
पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली जिले में निगम के 41 गेस्ट हाउस हैं। इनमें से कुछ ध्वस्त हो गए है और कुछ क्षतिग्रस्त हो गए हैं। लोगों से इनक्वायरी आई हैं, लेकिन एक भी एडवांस बुकिंग चार धाम यात्रा के लिए नहीं मिली। यह सोचा जा रहा है कि आय के स्रोत बढ़ाने के लिए क्या किया जाए?
-आरडी उनियाल, रीजनल मैनेजर जीएमवीएन

वाहन बुकिंग का भी बुरा हाल

चारधाम यात्रा के लिए हर साल जनवरी माह में विभिन्न परिवहन कंपनियों के पास बुकिंग शुरू हो जाती थी। मगर इस साल अभी तक किसी भी कंपनी के पास एक भी बुकिंग नहीं है। ऐसे में जलप्रलय के कारण गतवर्ष करोड़ों का नुकसान उठा चुकी कंपनियां इस साल भी यात्रा को लेकर आशंकित हैं।

पढ़ें, उत्तराखंड में बर्फबारी ने तोड़ा 33 सालों का र‌िकॉर्ड

कंपनी प्रतिनिधियों का कहना है कि यात्री उनसे यात्रा मार्गों की स्थिति के बाबत संपर्क साध रहे हैं, मगर राज्य सरकार की उदासीनता और सड़कों की स्थिति देखकर उनसे यात्रियों को जवाब देता नहीं बन रहा। मार्गों के दुरुस्त हुए बिना यात्रा को लेकर बने इसी संशय के कारण वह बुकिंग भी नहीं ले पा रहे हैं।

गतवर्ष 15 फरवरी तक कंपनी के पास 40 बसों 400 यात्रियों की एडवांस बुकिंग आ चुकी थी, इस बार कोई बुकिंग नहीं है।
-टीजीएमओयू (टिहरी-गढ़वाल मोटर्स ओनर्स यूनियन), अध्यक्ष विजयपाल सिंह धनै

यात्रा की तिथि तय
रास्ते बेशक बदहाल हैं, यात्री अभी रुचि नहीं दिखा रहे लेकिन बदरी-केदार समिति ने आगामी 5 मई को बदरीनाथ के कपाट खोलने की तिथि तय कर दी है। परंपरानुसार इससे पूर्व 2 मई को पड़ने वाली अक्षय तृतीया पर गंगोत्री और 3 मई को यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे। इसी माह शिवरात्रि को (27 फरवरी) केदारनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि और मुहूर्त तय किया जाएगा।

न गेस्ट हाउस बचा, न जमीन

रुद्रप्रयाग जिले में चंद्रापुरी और स्यालसौड़ ऐसे गेस्ट हाउस थे, जो मंदाकिनी नदी किनारे स्थित होने के कारण तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की पसंदीदा थे। यहां नंबर मुश्किल से आ पाता था।

पढ़ें, बदरीनाथ रावल के खिलाफ डटी है पीड़िता

बाढ़ से चंद्रापुरी का गेस्ट हाउस बचा, ना जमीन। जबकि स्यालसौड़ में थोड़ी सी जमीन और गेस्ट हाउस के ध्वस्त अवेशष बचे हैं। रामबाड़ा भी पूरी तरह साफ हो गया। जबकि केदारनाथ धाम में निगम के गेस्ट हाउस को काफी नुकसान पहुंचा है।

पढ़ें, उत्तराखंड में बर्फबारी ने तोड़ा 33 सालों का र‌िकॉर्ड

बताया जा रहा है कि क्षतिग्रस्त गेस्ट हाउस की मरम्मत लायक कमाई भी नहीं हो पा रही है।
विज्ञापन

बदरीनाथ हाईवे का बुरा हाल

बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा शुरू होने में अब सिर्फ ढाई माह का समय शेष बच गया है, लेकिन अभी तक रास्ते तैयार नहीं हैं। यहां सबसे बुरी स्थिति बदरीनाथ हाईवे की है।

पढ़ें, फैक्ट्री में धमाकों से दहली रुड़की

गत वर्ष आपदा में लामबगड़ और बेनाकुली में हाईवे करीब आधा किमी तक बह गया था। इन दिनों हुई बारिश और बर्फबारी के कारण सीमा सड़क संगठन के मजदूरों ने सड़कों की मरम्मत का कार्य छोड़ दिया है।

हाईवे पर बना दलदल
चमोली से पीपलकोटी के मध्य 15 किमी तक हाईवे से डामर उखड़ चुका है तो छिनका और बिरही में मिट्टी दलदल में तब्दील हो गई है। कोड़िया में चट्टान से हो रहा भूस्खलन भी परेशानी का सबब बना है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें