मंगलवार को हाइकोर्ट ने बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति को भंग करने के सरकार के एक अप्रैल 2017 को जारी अधिसूचना को निरस्त करते हुए मंदिर समिति को बहाल करने के आदेश प्रदेश सरकार को दिए हैं।
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार मंदिर समिति के सदस्य दिवाकर चमोली और दिनकर बाबुलकर ने हाइकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि मार्च में नवनिर्मित सरकार ने बिना किसी कारण के राजनीतिक दुर्भावना के चलते बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति को भंग कर दिया।
इसके साथ ही मंदिर समिति में प्रशासक नियुक्त कर दिया गया था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनका कार्यकाल अभी शेष है और तरह से समिति को भंग नहीं किया जा सकता। इस प्रकरण पर पूर्व में कोर्ट ने सरकार के इस आदेश पर रोक लगा दी थी।
मंगलवार को पक्षों की सुनवाई के बाद हाइकोर्ट की एकलपीठ ने सरकार के एक अप्रैल 2017 को जारी अधिसूचना को निरस्त करते हुए मंदिर समिति को बहाल करने के आदेश सरकार को दिए। यह मामला कांग्रेस और भाजपा के बीच की सियासी खींचतान का सबब भी बना था। कांग्रेस का आरोप था कि कांग्रेस पदाधिकारी होने के कारण इस समिति को भंग किया गया है।