लामबगड़ में बंद बद्नीनाथ हाईवे तीसरे दिन शुक्रवार को रुक रुककर बारिश के कारण नहीं खुल पाया। बारिश के कारण बद्नीनाथ धाम की तीर्थयात्रा को लेकर की जा रही तैयारियां भी ठप हो गई हैं। नीती सीमा क्षेत्र को बाहरी दुनिया से जोड़ने वाला मलारी हाईवे भी तीन दिन से सुराईथोटा के समीप बंद पड़ा है। हेलंग-उर्गम मोटर मार्ग भी थैंणा बैंड के पास बंद पड़ा है।
केदारनाथ में दूसरे दिन भी तेज बर्फीली हवाएं चलती रहीं और रुक-रुककर बर्फबारी होती रही। इस दौरान बिजली भी गुल रही। केदारपुरी में अधिकतम तापमान 8 और न्यूनतम माइनस 1 डिग्री सेल्सियस रहा। केदारनाथ में दो फीट तक ताजा बर्फ गिर चुकी है। द्वितीय केदार मद्महेश्वर, तृतीय केदार तुंगनाथ, चोपता, दुगलबिट्टा आदि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ गिरी है।
इधर, रुद्रप्रयाग में भी प्रात: 7 से 9 बजे तक तेज बारिश हुई। केदारघाटी के कई इलाकों में तेज बारिश हुई। रुद्रप्रयाग के कालीमठ घाटी के दूरस्थ चिलौंड में तेज ओलावृष्टि और बारिश से बीते तीन दिन में 100 से अधिक भेड़-बकरियों की मौत हो गई है।गढ़वाल के पहाड़ी इलाकों में शुक्रवार को भी आधे घंटे तक ओलावृष्टि हुई। देवाल में सुबह आठ बजे हुई भारी ओलावृष्टि से मेलखेत, नलधूरा, मोपाटा, घेस, हिमनी, खेता, मानमती, सौरीगाड़, रामपुर, तोरती और झलिया में फसल बर्बाद हो गई।
थराली, ग्वालदम, तलवाड़ी, चिड़िंगा मल्ला, कल्याणी, जौला आदि गांवों में हुई ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान हुआ है। नारायणबगड़, गैरसैंण, आदिबदरी और कर्णप्रयाग में हुई भारी बारिश और ओलावृष्टि से फसल और फलों को नुकसान हुआ है। थराली से मिली जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को हुई भारी बारिश से पिंडर घाटी की सड़कों पर मलबा आ गया। थराली-देवाल मोटर मार्ग के साहू गांव पुलिया में मलबा आने से मार्ग जानलेवा बना है। ग्वालदम-खंपाधार मोटर मार्ग भी मलबा आने से कई जगहों पर बंद हो गया है। नंदकेशरी-जौला, थराली-कुरार, लोल्टी- मालबज्वाड़ मोटर मार्ग बारिश से दलदल बन गए हैं। कोटद्वार क्षेत्र में तेज तूफान और ओलावृष्टि से आम, लीची की बौर झड़ गई। गेहूं के पके दाने भी झड़ गए हैं।