मान्यता है कि सरस्वती नदी का जल दुख-दर्द दूर करता है और घर में सुख-शांति लाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार एक परिवार यात्रा सीजन में दो से तीन लाख रुपये तक की कमाई कर लेता है। पूर्व ग्राम प्रधान पीतांबर मोल्फा बताते हैं कि माणा गांव में सरस्वती नदी प्रत्यक्ष रूप से बहती है। यहां अलकनंदा और सरस्वती नदी का संगम केशव प्रयाग के नाम से प्रसिद्ध है। श्रद्धालु पितरों के तर्पण और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए भी इस जल को अपने साथ ले जाते हैं।
मान्यता से जुड़ा है मानसूर तीर्थ का जल
माणा गांव में सरस्वती नदी के समीप स्थित मानसूर तीर्थ का जलस्रोत भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय मान्यता के अनुसार इस जल के आचमन से हकलाने की समस्या दूर हो जाती है। पूर्व प्रधान पीतांबर मोल्फा का कहना है कि हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इस जल को अपने साथ ले जाते हैं। उनका मानना है कि यदि इस जल का वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाए तो यह क्षेत्र के लिए आय का बड़ा स्रोत बन सकता है।