फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Badrinath: शीतकाल में बर्फबारी के बीच तप, साधना में लीन रहते हैं साधु-संत, 20 लोगों ने मांगी रहने की अनुमति

Thu, 27 Nov 2025 12:11 PM IST
रेनू सकलानी प्रमोद सेमवाल, संवाद न्यूज एजेंसी, गोपेश्वर (चमोली)

सार

बदरीनाथ धाम के कपाट  शीतकाल के लिए श्रद्धालुओं के लिए बंद हो गए हैं। शीतकाल में बर्फबारी के बीच साधु-संत यहां तप, साधना में लीन रहते हैं। 
विज्ञापन
बदरीनाथ धाम में बर्फबारी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बदरीनाथ धाम को तप और साधना के लिए पवित्र स्थान माना जाता है। यहां अत्यधिक बर्फबारी में भी कई साधु-संत गुफाओं और अपनी कुटिया में रहकर तपस्या में लीन रहते हैं। इस वर्ष शीतकाल में बदरीनाथ धाम में रहने के लिए 20 लोगों ने आवेदन किए हैं। इनमें अधिकांश साधु-संत हैं। जिन्होंने शीतकाल में यहां तप, साधना करने की अनुमति मांगी है।

विज्ञापन


बदरीनाथ मंदिर के कपाट बंद होने के बाद किसी भी व्यक्ति को हनुमान चट्टी से आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाती है। शीतकाल में छह महिने बदरीनाथ धाम क्षेत्र सेना, आईटीबीपी और मंदिर समिति के कर्मचारियों के हवाले रहता है। बदरीनाथ धाम ध्यान, साधना का केंद्र है।

विज्ञापन

ज्योतिर्मठ तहसील प्रशासन से अनुमति लेनी जरुरी
शीतकाल में अत्यधिक बर्फबारी के बावजूद कई साधु-संत गुफाओं और कुटिया में तपस्या में लीन रहते हैं। शीतकाल में धाम में रहने के लिए ज्योतिर्मठ तहसील प्रशासन से अनुमति लेनी जरुरी होती है। इस वर्ष अभी तक 20 लोगों की ओर से शीतकाल में धाम में रहने की अनुमति मांगी गई है।

ये भी पढ़ें...उत्तराखंड: AI मिशन 2025 की दो नीतियों का ड्राफ्ट जारी, पहाड़ की जरूरतों के हिसाब से तैयार की गई है पॉलिसी

ज्योतिर्मठ के उपजिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि अभी तक 20 लोगों की ओर से शीतकाल में बदरीनाथ धाम में रहने के लिए अनुमति मांगी गई है। इन आवेदनों को पुलिस कार्यालय भेज दिया गया है। कागजों के साथ ही संबंधित व्यक्ति की जांच के बाद उन्हें धाम में रहने की अनुमति प्रदान की जाएगी। बीते वर्ष भी इतने ही लोगों ने धाम में रहने की अनुमति ली थी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें