ऐसे पूरी हुई कपाट बंद होने की प्रक्रिया
इसके बाद दोपहर 1:45 बजे रावल (मुख्य पुजारी) ईश्वर प्रसाद नंबूदरी ने स्त्रीवेश धारण कर माता लक्ष्मी की प्रतिमा को बदरीनाथ गर्भगृह में विराजमान किया। इससे पूर्व उद्धव जी और कुबेर जी की प्रतिमा को मंदिर प्रांगण में विराजमान किया गया। 2:15 बजे सांयकालीन भोग और शयन आरती संपन्न हुई। 2:30 से 3:30 बजे तक रावल ने कपाट बंद करने की रस्म पूरी की। दोपहर 3:33 बजे धाम के गर्भगृह और मुख्य सिंहद्वार को शीतकाल के लिए बंद कर दिया गया। इसके बाद कुबेर जी की उत्सव डोली श्रद्धालुओं के साथ बामणी गांव पहुंच गई है। रविवार को डोली पांडुकेश्वर गांव पहुंचेगी। बीकेटीसी के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने बताया कि रविवार काे रावल के साथ आदिगुरु शंकराचार्य की गद्दी पांडुकेश्वर पहुंचेेगी।
बदरीनाथ भगवान को ओढ़ाया घृत कंबल
धाम के कपाट बंद होने से पहले देश के प्रथम गांव माणा गांव की भोटिया जनजाति की महिलाओं द्वारा बदरीनाथ भगवान को ऊन का घृत कंबल ओढ़ाया गया। यह कंबल विशेष रूप से माणा गांव की महिलाओं द्वारा तैयार किया जाता है। गांव की कन्याएं और सुहागिन महिलाएं इस कंबल का निर्माण करतीं हैं। घृत कंबल (घी में भिगोया ऊन का कंबल) डेढ़ मीटर लंबा होता है। जिस दिन ये घृत कंबल तैयार किया जाता है, उस दिन गांव की कन्याएं और महिलाएं उपवास रखती हैं। भगवान बदरीनाथ को माणा गांव के ग्रामीण अपने आराध्य देवता मानते हैं।
धाम में तीर्थयात्रियों का टूटा रिकॉर्ड
जोशीमठ। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी योगेंद्र सिंह ने बताया कि इस वर्ष 27 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट खुले थे। इस यात्रा सीजन में 18,42,019 तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए। जो अभी तक का रिकॉर्ड है। वर्ष 2022 में 17,60646 तीर्थयात्री यहां पहुंचे थे।
गेंदे के फूलों से सजाया गया था बदरीनाथ धाम
कपाट बंद होने पर पुष्प सेवा समिति ऋषिकेश की ओर से मंदिर को करीब 20 कुंतल गेंदे के फूलों से सजाया गया था। जिससे मंदिर भव्य नजर आ रहा था। मुख्य सिंहद्वार के साथ ही लक्ष्मी मंदिर, हनुमान मंदिर, घंटाकर्ण मंदिर को भी फूलों से सजाया गया था। बदरीनाथ पुष्प सेवा समिति की ओर से प्रतिवर्ष कपाट खुलने व बंद होने पर धाम को फूलों से सजाया जाता है। संवाद
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शंकराचार्य शुरू करेंगे शीतकालीन यात्रा
ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज भी बदरीनाथ धाम पहुंचे। उन्होंने कहा कि वे आगामी माह से चारधाम की शीतकालीन यात्रा शुरू करेंगे। धामों के शीतकालीन प्रवास स्थलों में सुविधाएं बढ़ाई जानी चाहिए। कहा कि ग्रीष्मकाल में मुख्य मंदिरों में तीर्थयात्रा छह माह के लिए बंद रहनी चाहिए, लेकिन शीतकालीन प्रवास स्थलों तक तीर्थयात्रा जारी रखी जानी चाहिए। जिससे तीर्थयात्रियों का देवभूमि में आना-जाना बना रहे।
विधि-विधान से बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। इस वर्ष दोनों धामों में 38 लाख तीर्थयात्री दर्शनों को पहुंचे। आगामी वर्षों में यात्री संख्या में इजाफा होने की उम्मीद है।
- अजेंद्र अजय, अध्यक्ष, बीकेटीसी
बदरीनाथ कपाट बंद होने पर भावुक हुए रावल
बदरीनाथ धाम के रावल (मुख्य पुजारी) ईश्वर प्रसाद नंबूदरी धाम के कपाट बंद होने पर भावुक हो उठे। कपाट बंद होने के बाद जब श्रद्धालुओं के बीच वे सिंहद्वार से अपने आवास की ओर आ रहे थे तो वे फफक कर रो पड़े। तब बीकेटीसी अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने उन्हें ढांढस बंधाया। बदरीनाथ धाम में मनुष्य और देवताओं द्वारा भगवान बदरीनाथ की पूजा की धार्मिक मान्यता है। ग्रीष्मकाल में छह माह तक मनुष्यों की ओर से दक्षिण भारत के नंबूदरी ब्राह्मण धाम में पूजा-अर्चना करते हैं, जबकि शीतकाल में छह माह तक देवताओं की ओर से महर्षि नारद भगवान बदरीनाथ की पूजा-अर्चना का जिम्मा संभालते हैं। यह परंपरा सतयुग से चली आ रही है। संवाद