शीतकाल के लिए बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि विजयदशमी को निर्धारित की जाएगी।
परंपरा के अनुसार विजयदशमी के दिन आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी और बदरीनाथ मंदिर के रावल के सामने आचार्य ब्राह्मणों की ओर से पंचांग देखकर बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि का निर्धारण किया जाता है।
इस मौके पर मंदिर में विशेष पूजा अनुष्ठान का आयोजन होता है। कपाट बंद होने की तिथि निर्धारण के साथ ही यहां बदरीनाथ धाम के विभिन्न कार्यों को करने के लिए हक-हकूकधारियों की बारी का भी निर्धारण किया जाता है।
कमदी, भंडारी और मेहता थोक के लोग यहां व्यवस्थाएं देखते हैं। इन्हें गुलाबी पगड़ी पहनाई जाती है जिसे बाद इन्हें इनके कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी जाती है।