मौसम के बदले मिजाज ने चुनाव में उतरे नेताओं को और परेशान कर दिया है। हाल यह है कि कई प्रत्याशियों को अपनी जनसभाएं स्थगित करनी पड़ीं।
मौसम के बदलते मिजाज का ही असर है कि नेताओं को अब मौसम विभाग की भविष्यवाणियों को भी टटोलना पड़ रहा है।
जून 2013 की आपदा के दौरान मौसम विभाग के पूर्वानुमान को बहुत हद तक नजरअंदाज कर दिया जाता था। आपदा के बाद यह स्थिति बदली है और मौसम के अलर्ट पर गौर किया जाने लगा है।
आमतौर पर अप्रैल में सूखा रहने वाला मौसम इस बार पानी बरसा रहा है। ऐसे में चुनाव के गरमाने के समय नेताओं के ताबड़तोड़ दौरों पर इसकी छाया है।
छूटा हरक का हेलिकॉप्टर
रविवार को कांग्रेस प्रत्याशी हरक सिंह रावत को हेलिकॉप्टर का मोह छोड़ना पड़ा। हरक ने पोखड़ा और चौबट्टाखाल में हेलिकॉप्टर से पहुंचकर जनसभा में शामिल होना तय किया था।
खराब मौसम के कारण हरक को दोनों स्थानों की जनसभाओं को स्थगित करना पड़ा और कार से सफर कर लोगों से मिलने पहुंचना पड़ा।
इसी तरह केदारघाटी का जायजा हवाई सर्वे के जरिए करने का मन बना चुके मुख्यमंत्री हरीश रावत को भी अपना कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा।
हेलिकॉप्टर से प्रचार के कई फायदे
हेलिकॉप्टर से प्रचार करना नेताओं के लिए खासा मुफीद भी रहता है। एक तो हेलिकॉप्टर का आकर्षण भी लोगों को खींच लाता है। फिर ‘चट मंगनी पट ब्याह’ वाला हिसाब भी रहता है। हेलिकॉप्टर से पहुंचे, जनसभा में शामिल हुए और फिर उड़ लिए।
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मौसम साफ है तो सड़क के गड्ढों का भी पता नहीं चलता और रोड ब्लॉक की भी चिंता नहीं करनी होती।