उत्तराखंड में सरकारी शिक्षा व्यवस्था का क्या हाल है। इसकी एक बानगी चंपावत जनपद में देखने को मिली। जिले के सरकारी विद्यालयों में एक के बाद एक ताला लटकता जा रहा है। छात्र संख्या नहीं होने से इस माह दो और सरकारी स्कूल बंद हो गए।
इस कारण मौजूदा शिक्षा सत्र में पांच प्राथमिक एवं जूनियर हाइस्कूलों में ताले लटक गए हैं। वहीं राज्य बनने के बाद से 17 वर्ष से भी कम समय में जिले में 17 स्कूल बंद हो गए हैं। नतीजतन छात्र संख्या ही नहीं, सरकारी स्कूलों की संख्या भी लगातार कम हो रही है।
प्राइवेट शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश को लेकर होड़ मची है। वहीं दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों में शैक्षिक गुणवत्ता तो दूर, स्कूलों को तालाबंदी से बचाना भी कठिन होता जा रहा है। इस माह दो और सरकारी प्राथमिक एवं जूनियर हाइस्कूलों के बंद होने से मौजूदा शिक्षा सत्र 2017-18 में चंपावत जिले में कुल पांच स्कूलों में ताले लटक गए हैं।
इस तरह जिले में अब तक 17 स्कूल बंद हो गए हैं। अप्रैल में दो प्राथमिक विद्यालय और एक जूनियर हाइस्कूल छात्र संख्या नहीं होने से बंद हुए तो वहीं अब पाटी में भी दो स्कूलों पर ताला लटक गया है। पाटी के उप शिक्षाधिकारी मनीष बिष्ट ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय सुंदरचौड़ और भोकड़ा जूनियर हाइस्कूल इस माह बंद हो गया।
पिछले साल सुंदरचौड़ स्कूल में एक छात्र था, जो पांचवीं पास करने के बाद स्कूल से निकल गया है। वहीं भोकड़ा स्कूल के तीन छात्र भी स्कूल छोड़ गए हैं। एबीईओ ने बताया कि यहां के शिक्षकों को नजदीक के स्कूल से संबद्ध किया जा रहा है। इसी के साथ अब जिले में 95 राजकीय जूनियर हाईस्कूल और 501 प्राथमिक स्कूल बच गए हैं।