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12 घंटे तक भूख से तड़पता रहा दो माह का मासूम, सुबह बिस्तर पर मरा हुआ मिला

Fri, 08 Jun 2018 06:41 AM IST
रुद्रेश आर्य,  अमर उजाला, देहरादून
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शिशु निकेतन में दो माह के अक्षत को 12 घंटे से भूखा रखा गया था। अक्षत की मौत के मामले में एसआईटी की ओर से दायर आरोप पत्र में यह खुलासा हुआ है।

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इस खुलासे के मुताबिक जब अक्षत बिस्तर पर मृत मिला तो केयर टेकर ने झूठ बोल दिया कि उसने एक घंटे पहले ही उसे दूध पिलाकर सुलाया था।

एसआईटी ने जब अक्षत के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखी तब इस बात का खुलासा हुआ कि उसकी मौत अधिक देर तक भूखा रहने के कारण हुई थी। पोस्टमार्टम में बच्चे का आमाशय खाली होना पाया गया था। मामले में केयर टेकर सुशीला के विरुद्ध मुकदमा दर्ज है। 
 

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मामले को रफा-दफा करने की हुई पुरजोर कोशिश

डेमो - फोटो : डेमो
अक्षत की मौत साल 2016 में हुई थी। घटनाक्रम के अनुसार दो माह का अक्षत सुबह सात बजे बिस्तर पर मृत पड़ा मिला था।

उस वक्त वहां तैनात केयर टेकर सुशीला ने बताया था कि उसने सुबह पांच बजे अक्षत को दूध पिलाकर सुला दिया था। मामले को इसी तरह रफा-दफा करने का प्रयास किया गया।

एसआईटी प्रभारी डीएसपी जया बलूनी ने बताया कि इस मामले की विस्तार से जांच की गई तो बहुत बड़ी लापरवाही सामने आई।

 

अक्षत की मौत सुबह सात बजे नहीं बल्कि रात में एक से दो बजे के बीच हुई

investigation
एसआईटी ने सबसे पहले अक्षत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जांच की। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों ने पाया था कि अक्षत की मौत सुबह सात बजे नहीं बल्कि रात में एक से दो बजे के बीच हुई थी।

अंतिम बार उसे दिन में लगभग एक से दो बजे के बीच दूध पिलाया गया था। इस तरह लगभग 12 घंटे भूखा रहने के चलते अक्षत की मौत हुई।

इन्हीं सब रिपोर्ट को आधार बनाते हुए सुशीला के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया है। 

 
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तीन साल की मौली की कमर जलने के मुकदमे में भी आरोपपत्र दाखिल

court
2014 में तीन साल की मौली की कमर जलने के मुकदमे में भी आरोपपत्र दाखिल किया गया है। इस मामले में केयर टेकर शांति और फार्मासिस्ट हरिकिशन के खिलाफ मुकदमा दर्ज है।

डीएसपी बलूनी ने बताया कि घटना वाले दिन मौली के शरीर पर गंदगी लगी थी, जिसे धोने के लिए मौली ने शांति से कहा। इसके बाद शांति ने खुद इसे साफ न करते हुए एक बच्चे को कह दिया।

बच्चे ने अज्ञानतावश उसे गर्म पानी के नल के नीचे बैठा दिया। बच्ची को दून अस्पताल में ले जाया गया, जहां से उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। लेकिन, फार्मासिस्ट हरिकिशन उसे शिशु निकेतन ले आया। हरिकिशन और शांति के खिलाफ इन्हीं आरोपों की पुष्टि करते हुए न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया है।
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