इसलिए सबसे अच्छा तरीका यही है कि संसद में कानून बनाकर ही अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि राम मंदिर अब नहीं बन सकता तो कब बनेगा।
बता दे कि मंगलवार को शदाणी दरबार के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण उदासीन कार्ष्णि पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी गुरू शरणानंद महाराज, स्वामी सत्यामित्रानन्द गिरि महाराज और दक्षिण काली पीठाधीश्वर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने किया।
इस अवसर पर स्वामी गुरू शंरणानंद महाराज ने कहा कि संत ईश्वर अंश है जो मानवमात्र का कल्याण करने के लिए धरा पर अवतरित होते हैं। संत चलते-फिरते तीर्थ हैं। जो भी इनके सानिध्य में आता है।
उनका कल्याण हो जाता है। भारत माता में मंदिर के संस्थापक स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज ने शदाणी दरबार के परमार्थ के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रतिवर्ष पाकिस्तानी हिंदुओं को तीर्थयात्रा कराकर शदाणी दरबार भारत-पाकिस्तान के हिंदुओं के मध्य सद्भावना के सेतु का कार्य करता है।
श्री दक्षिण काली पीठाधीश्वर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि तीर्थनगरी हरिद्वार में शदाणी भक्त निवास परमार्थ के कार्यों का केंद्र बनेगा। इस अवसर पर पर शदाणी दरबार के पीठाधीश्वर डा. संतश्री युधिष्ठर लाल ने कहा कि गुरुदेव की कृपा से यह प्रयास साकार हुआ है।
इस अवसर पर स्वामी प्रेमानन्द, स्वामी गंगादास उदासीन, श्रीमहंत ललितानंद गिरि, स्वामी विवेकानंद, लाल माता मंदिर के संचालक भक्त दुर्गादास, भारत माता मंदिर के मुख्य न्यासी आईडी शर्मा शास्त्री, विश्व हिंदू परिषद के प्रदेश मंत्री प्रदीप मिश्रा, जिला अध्यक्ष नितिन गौतम, नव निर्वाचित पार्षद अनिल मिश्रा, अनिरुद्ध भाटी आदि उपस्थित रहे। समारोह का संचालन महेश मोटवानी ने किया।