योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि आजादी के आंदोलन में संतों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जनमानस में भी संतों को विशेष स्थान मिला है। उन्होंने कहा कि हम संतों का जनेरेटिक ढांचा अलग-अलग हो सकता है, लेकिन व्यक्तित्व सबका एक होना चाहिए।
बाबा रामदेव पतंजलि योगपीठ में पतंजलि और धर्म जागरण मंच की ओर से आयोजित संत सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह संत सम्मेलन नए आयाम स्थापित करेगा। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि भारतीय संस्कृति संतों और ऋषियों की संस्कृति है।
संत राष्ट्र के निर्माता होते हैं। शरीर परमात्मा का मंदिर है, इसे योग-आयुर्वेद से स्वस्थ रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि साधु की इस उच्च अवस्था के कारण आम जनमानस इन्हें अपना आदर्श मानता है।
आचार्य ने कहा देश में स्वास्थ्य से लेकर संस्कृति तक संत ही हमारे संवाहक हैं। गोविंद गिरि महाराज ने कहा कि देश जब-जब गुलामी में जकड़ा तो संतों ने उससे मोर्चा लेकर देश को गरिमा प्रदान की। 11 सितंबर तक चलने वाले इस संत सम्मेलन में महामंडलेश्वर विश्वेश्रानंद महाराज, महामंडलेश्वर हरिहरानंद महाराज, महामंडलेश्वर ज्ञानानंद महाराज सहित बड़ी संख्या में संत भाग ले रहे हैं।