स्वामी रामदेव ने कहा कि शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने श्री श्री रविशंकर के नाम का जो विरोध किया है, उसका कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि श्री राम मंदिर मामले में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती कोई पक्ष नहीं है। हां यदि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को लेकर श्री राम जन्म भूमि न्यास या विश्व हिंदू परिषद कुछ बोलती है तो उसका महत्व है, क्योंकि विश्व हिंदू परिषद ने ही पूरे देश में राम मंदिर निर्माण को लेकर आंदोलन खड़ा किया है।
अच्छा होता पक्षकार भी होते शामिल
श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो मध्यस्थत नियुक्त किए हैं उसमें राम मंदिर से जुड़े अन्य पक्ष कारों का प्रतिनिधित्व होता तो और अच्छा रहता। परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हम स्वागत करते हैं और हमें उम्मीद है राम मंदिर के निर्माण का मार्ग सूझबूझ के साथ प्रशस्त किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत
शांतिकुंज के अधिष्ठाता डा. प्रणव पंड्या ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से राम मंदिर मसले का हल सुलझाने के लिए मध्यस्थता का रास्ता सुझाने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थतों के प्रयास से कुछ खास निकल पाएगा ऐसी उन्हें कम ही उम्मीद दिखती है। काफी कुछ मध्यस्थतों की पैरवी पर निर्भर करेगा वे कितनी निष्पक्षता से अपनी बात रख पाते हैं। उन्होंने कहा कि हर हिंदू धर्मावलंबी अयोध्या में भगवान राम का भव्य निर्माण होता देखना चाहता है। रास्ता कोई भी निकले मंदिर बनना चाहिए।
बेहद गोपनीय हो मध्यस्थता, फैसला कोर्ट ही सुनाए
भूमा पीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद तीर्थ महाराज ने कहा कि फैसला तो स्वागत योग्य है लेकिन यदि कोई निर्णय नहीं निकला तो सुप्रीम कोर्ट की गरिमा को ठेस पहुंचेगी। ऐसे में यह बेहद जरूरी है जो भी मध्यस्थ बनाए वे अपनी मध्यस्थता की प्रक्रिया बेहद गोपनीय तरीके से संपन्न करें। जो भी राय बने उसे लेकर फैसला न्यायालय ही सुनाए न कि मध्यस्थ खुद ही उसे सार्वजनिक कर दें।