योग में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट लेने के बाद विदेश में जॉब के लिए जाने वाले युवाओं को वहां की भाषा की सबसे अधिक दिक्कतें आ रही है, क्योंकि डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स अवधि के दौरान छात्र-छात्राओं को सिर्फ योगाभ्यास करने का ही प्रशिक्षण मिल पाता है। अंग्रेजी सहित अन्य विदेशी भाषाओं का ज्ञान छात्रों को पढ़ाई के दौरान नहीं मिल पाता है। जो युवाओं के जॉब करियर में बाधा बन रही है।
विवि के कुलपति डा.यूएस रावत ने बताया कि विवि नए सत्र से बीए में तीन साल और एमए में दो साल का योगा डिग्री कोर्स शुरू करने की तैयारी कर चुका है। कार्य परिषद और विद्या परिषद की अनुमति मिलने के बाद जुलाई से योग में प्रवेश शुरू किया जाएगा।
योग में डिग्री लेने के दौरान छात्र-छात्राओं को लैग्वेज लैब के माध्यम से अंग्रेजी, जर्मनी, फ्रांस सहित अन्य विदेशी भाषा बोलने में भी दक्ष किया जाएगा। ताकि प्लेसमेंट के दौरान भाषाई ज्ञान का अभाव बाधा न बने।