इस दौरान धाम में कुल तीस लोग मौजूद रहेंगे। संत स्वामी ललित रामदास ने बताया कि वे बीते 13 वर्षो से भगवान राम के दर्शन करते आ रहे है। मान्यता है कि आदिदेव महादेव के ईष्ट भी श्रीराम ही हैं।
राम नाम लेकर ही उन्होंने विष को अपने कंठ में लिया था, और नीलकंठ के नाम से जप किया। अयोध्या में 500 साल बाद हो रहे प्रभु राम की प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन किया जा रहा है, ऐसे में धाम में खासा उत्साह बना हुआ है।