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खेतों में बीमारी का खतरा, सड़क पर ग्रामीण

Sun, 07 Feb 2016 02:51 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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डोईवाला ब्लॉक के कई गांवों के ग्रामीणों ने देहरादून में सुसवा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए जन जागरूकता रैली निकाली।
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शनिवार को निकाली गई इस रैली में शामिल स्कूली बच्चों, पूर्व सैनिकों और किसानों ने स्कूली बच्चों, पूर्व सैनिकों और किसानों ने कहा कि रसायनिक कचरा और पॉलिथीन खेतों में पहुंचने से खेती प्रभावित हो रही है, वही उन्हें बीमारी का खतरा बना है।

डोईवाला ब्लॉक के दूधली, नागल बुलंदावाला, नागल ज्वालापुर, सिमलास ग्रांट और बुल्लावाला सहित कई गांवों के जनप्रतिनिधियों, पूर्व सैनिकों, बच्चों और किसानों ने शनिवार को रेंजर्स मैदान से परेड ग्राउंड कनक चौक, सर्वे चौक होते हुए वापस परेड ग्राउंड तक रैली निकाली।
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ग्रामीणों ने कहा कि दून शहर के सीवर का पानी बगैर ट्रीटमेंट के डोईवाला ब्लॉक के 12 से अधिक गांवों के ग्रामीणों के खेतों में पहुंच रहा है। इससे खेती के साथ क्षेत्र में भूजल प्रभावित हो रहा है। उत्तराखंड सैनिक अर्द्ध सैनिक संयुक्त संगठन के कर्नल जीवन सिंह बसेरा (सेवानिवृत्त) ने कहा कि नदी से खेतों में मोटर गैराज का तेल मिला गंदा पानी पहुंच रहा है। इससे नदी की मछलियां समाप्त हो गई हैं, वहीं फसलों और पेयजल पर भी प्रतिकूल असर हो रहा है।

इससे पहले डोईवाला के विधायक हीरा सिंह बिष्ट ने रैली को हरी झंडी दिखाई। रैली में ग्राम प्रधान नागल ज्वालापुर विरेंद्र थापा ने कहा कि जिस सुसवा नदी में शहर का सीवर छोड़ा जा रहा है यह पानी सौंग नदी से होते हुए गंगा में मिल रहा है। रैली निकालने वालों में प्रधान सीमलास ग्रांट गीता देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य दरपान बोरा, दीवान सिंह बोरा, प्रधान मारखमग्रांट परविंदर, प्रधान दूधली हीरा थापा, एसएस भाटिया, कलम सिंह, चंद्र सिंह बोरा, प्रमोद कुमार, कमल थापा, मोहन बोरा, राजकुमार आदि शामिल रहे।

पेयजल, अब छूने लायक नहीं
दून की प्रसिद्ध बासमती के लिए जारी जाने वाली दूधली घाटी और आसपास के एक दर्जन गांव के ग्रामीण सुसवा नदी के जिस पानी को कभी पीने के लिए इस्तेमाल करते थे, वह अब न सिर्फ ग्रामीणों बल्कि उनकी खेती को भी बीमार कर रहा है। नदी में दून का सीवर छोड़े जाने से गंदगी और पॉलिथीन ग्रामीणों के खेतों में बहकर पहुंच रही है।
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क्षेत्र पंचायत सदस्य दरपान बोरा के मुताबिक दूषित पानी से किसानों को चर्म रोग होने का खतरा बना है। गंगा नदी को स्वच्छ करने के लिए सुसवा नदी को स्वच्छ भारत अभियान से जोड़ा जाना चाहिए। कृषि वैज्ञानिक डा.एसएस सिंह के मुताबिक इससे भूमि की उर्वरा क्षमता प्रभावित हो रही है। कचरे और पॉलीथिन के खेतों में पहुंचने से भविष्य में भूमि पूरी तरह से बंजर हो सकती है।
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