गंगा को नया जीवनदान देने के लिए गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती और पर्यावरण, वन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने हाथ मिला लिया है।
नदी की जैव विविधता को कायम रखने की पहल
दोनों ही मंत्रियों ने इस संबंध में गुरुवार को बैठक कर फैसला लिया। बैठक में फैसला लिया गया कि गंगा के संरक्षण के लिए इसमें औद्योगिक कचरा प्रवाहित करने से रोका जाएगा।
साथ ही ई-प्रवाह को कम किया जाएगा। यह कदम नदी की जैव विविधता को कायम रखने के लिए उठाया जाएगा। इससे नदी के ऊपरी हिस्से की प्रजातियों के साथ आसपास के प्रवासियों को संरक्षण मिल सकेगा।
वहीं दोनों मंत्रालयों ने यह भी फैसला लिया कि गोमुख से उत्तरकाशी तक गंगा की 130 किलोमीटर की दूरी पर गतिविधियों पर लगी पाबंदी और सख्ती से लागू किया जाएगा।
यही नहीं दोनों मंत्रियों ने फैसला लिया कि वैज्ञानिक तरीके से और दीर्घकालिक बालू खनन की व्यवस्था करने के लिए बालू खनन के दिशा निर्देशों को संशोधित किया जाएगा।
मंत्रियों ने यह भी निर्णय लिया कि गंगा में औद्योगिक कचरा प्रवाहित करने से रोकने के लिए औद्योगिक प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की जाएगी। उद्योगपतियों को कचरे के शुद्धीकरण को प्रेरित किया जाएगा।
ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था शुरु करने का फैसला
इसके लिए छह माह के अंदर ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था को शुरू करने का भी निर्णय लिया गया। उद्योगपतियों को बताया जाएगा कि किस तरह से साफ किए गए पानी को वापस प्रयोग में लाया जा सकता है।
यही नहीं जैव विविधता को बरकरार रखने के लिए गंगा के दोनों किनारों वृक्षारोपण का फैसला लिया गया है।
यही नहीं इस कार्य के दौरान शुरू होने वाली विभिन्न परियोजनाओं के चलते विस्थापित होने वाले लोगों को इनमें शामिल कर रोजगार मुहैया कराया जाएगा, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित नहीं हो।