11 मार्च का सभी को इंतजार है। उम्मीदवारों की बेताबी समझी जा सकती है। वोटर भी इंतजार में है कि उसका फैसला कितना सटीक या गलत बैठा है। इन सारी स्थितियों के बीच बीजेपी के उन धुरंधरों का इंतजार भी मायने रखता है, जो कि चुनावी राजनीति से बाहर रहे हैं। बीजेपी का परचम बुलंद होता है, तो सरकार में उनकी भूमिका किसी न किसी रूप में तय है। इनमें से कई नेता इसी तरह के भरोसे पर चुनाव के अखाडे़ में नहीं कूदे। इसके अलावा कई ऐसे हैं, जिनका बीजेपी के साथ उस वक्त का नाता है, जबकि पार्टी को उत्तराखंड में कोई नहीं जानता था।
इन धुरंधरों को एडजस्टमेंट की आस
-बची सिंह रावत
पूर्व केंद्रीय मंत्री, पूर्व सांसद और बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बची सिंह रावत इस बार विधायक का चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन नहीं लड़ पाए। बीजेपी का घोषणापत्र तैयार करने वाली कमेटी के अध्यक्ष रहे हैं। अहम दायित्व के लिए सबसे मजबूत दावेदारों में से एक हैं।
-मनोहर कांत ध्यानी
राज्यसभा के पूर्व सदस्य, बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के अलावा मनोहर कांत ध्यानी की पहचान कमजोर दिनों में बीजेपी का झंडा उठाने वाले नेता की रही है। यूपी के जमाने में वे बद्री-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष भी रहे। किसी आयोग या परिषद में अहम दायित्व पाने के मजबूत दावेदार हैं।
-विजया बड़थ्वाल
तीन बार की विधायक, डिप्टी स्पीकर और कैबिनेट मंत्री रहीं विजया बड़थ्वाल का एडजस्टमेंट सरकार की इंतजारी में रुका हुआ है। सिटिंग एमएलए होने के बावजूद उनका इस बार यमकेश्वर सीट से टिकट काटा गया। अहम जिम्मेदारी के भरोसे ने ही उन्हें बीजेपी में रोका हुआ है।
-मोहन सिंह रावत गांववासी
पौड़ी सीट से मोहन सिंह रावत गांववासी पूर्व विधायक रहे हैं। इसके अलावा राज्य बनने के बाद अंतरिम सरकार में परिवहन मंत्री भी बने थे। बीजेपी में हालांकि बहुत ज्यादा सक्रिय नहीं है, लेकिन संघ की पृष्ठभूमि अहम दायित्व के लिए मजबूत दावेदार बनाती है।
-पूरण चंद्र शर्मा
बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष पूरण चंद्र शर्मा यूपी के जमाने में पर्वतीय विकास मंत्री रहे हैं। बीजेपी की सियासत में बहुत ज्यादा सक्रिय नहीं हैं, लेकिन संगठन में अब भी पूरी पकड़ है। सरकार बनने की स्थिति में एडजस्टमेंट तय माना जा रहा है।
-बलराज पासी
1991 के लोकसभा चुनाव में नैनीताल सीट पर एनडी तिवारी को हराने वाले बलराज पासी की संगठन में हाल के दिनों में स्थिति काफी मजबूत हुई है। अहम कार्यक्रमों में उन्हें अहम जिम्मेदारी दी गई है। सरकार बनने पर अहम जिम्मेदारी मिल सकती है।
-तीरथ सिंह रावत
पूर्व शिक्षा मंत्री, पूर्व बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत का इस बार चौबट्टाखाल से टिकट काट दिया गया है। क्षतिपूर्ति करते हुए उन्हें राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है, लेकिन सरकार बनने की स्थिति में वह अपने लिए एडजस्टमेंट की आस लगाए हैं। उन्हें भी एडजस्ट किया जा सकता है।