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बर्फीले तूफान से 'जम' गए उत्तराखंड के गांव

Sun, 11 Jan 2015 04:44 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, धारचूला (पिथौरागढ़)
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बर्फीले तूफान से उत्तराखंड की चौदांस घाटी के सात गांवों में तबाही मच गई। तहसील मुख्यालय से 55 किलोमीटर दूर स्थित इन गांवों में संचार और यातायात की कोई सुविधा न होने के कारण क्षति की सूचनाएं तीन दिन बाद तहसील मुख्यालय पहुंची हैं। यह तूफान बीती आठ जनवरी को आया था।
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उपजिलाधिकारी प्रमोद कुमार के आदेश पर गांवों का जायजा लेने चौदांस घाटी गए राजस्व उपनिरीक्षक नंद लाल की रिपोर्ट के अनुसार गाला और तांकुल गांव में भारी तबाही मची, जबकि अन्य गांवों में घरों को छिटपुट नुकसान हुआ।

राजस्व उपनिरीक्षक के साथ गाला के प्रधान देवी दत्त उपाध्याय और तांकुल के प्रधान सोबन राम भी यहां पहुंचे हैं। इन गांवों में लोग पत्थर और लकड़ी की सहायता से घरों का निर्माण करते हैं। छतों में टिन डाल दी जाती है। यदि टिन उपलब्ध न हो तो लोग छतों में पत्थर (पाथर) डाल देते हैं।
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गाला में इंद्रा देवी, कुंदन सिंह, मनिकृष्ण, अनिल राम, सूर सिंह, नारायण दत्त, दरपान सिंह, मंगल सिंह, दौलत सिंह, प्रेम सिंह, पूरन सिंह, सुमन देवी, हर सिंह के घरों की छत उड़ गईं। मकान की दीवारों को भी नुकसान पहुंचा है। तांकुल में सुंदर सिंह, पुष्कर सिंह, जमन सिंह, गगन सिंह, काशी दत्त, तुला राम, जसमल सिंह, गीता देवी, धन सिंह, दानी राम, जीवन सिंह, बहादुर सिंह के घरों को क्षति पहुंची है।

नेपाली नेटवर्क भी दे गया दगा

इसके अलावा गर्वाधार, जिप्ती, बासिमखोला, मांगती, घट्टाबगड़ में भी मकानों की छत उड़ी हैं। उपजिलाधिकारी ने बताया कि क्षति की रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी जा रही है ताकि प्रभावितों को मकान की मरम्मत के लिए राहत राशि दी जा सके। जिन लोगों के घरों को नुकसान पहुंचा है उनको गांव में ही दूसरे खाली मकानों में रखा गया है।

इस तहसील के दूरस्थ गांवों में भारत संचार निगम का कोई नेटवर्क नहीं है। अक्सर लोग नेपाली नेटवर्क का उपयोग करते हैं। नेपाल के सीमांत गांवों में नमस्ते और स्काई कंपनियों के नेटवर्क हैं।

मौसम खराब होने पर इस नेटवर्क का लोगों को कोई फायदा नहीं मिल पाता। बर्फीले तूफान से नुकसान वाली सूचना भी इसी कारण समय पर नहीं मिल पाई।

आपदा प्रबंधन भी फेल
सीमा सड़क संगठन ने मांगती से गर्वाधार तक सड़क तो बनाई है, लेकिन पिछले पांच साल से यह सड़क जर्जर हालत में है। गर्वाधार से इन गांवों तक जाने के लिए लोगों को पांच से दस किमी का पैदल सफर करना पड़ता है।

प्रशासन का आपदा प्रबंधन विभाग भी ऐसी आपदा के समय फेल साबित हो जाता है। ये गांव 2013 की आपदा के समय भी बुरी तरह प्रभावित हो गए थे।
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पहाड़ों पर धूप, मैदान में कोहरा

नैनीताल, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा समेत पहाड़ी इलाकों में जहां सर्दियों के इस मौसम में लोग गुनगुनी धूप का आनंद ले रहे हैं, वहीं मैदान के लोग दिन भर लगे कोहरे के चलते घरों में दुबके रहे।

स्थानीय लोगों के साथ ही नैनीताल घूमने पहुंचे पर्यटकों ने शनिवार को सुहावने मौसम के बीच झील में नौकायन के साथ ही दर्शनीय स्थलों का भ्रमण किया। शनिवार को सरोवर नगरी का अधिकतम तापमान 14 डिग्री तो न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

इधर, तराई-भाबर में तीसरे दिन भी घना कोहरा छाया रहा। शाम को कोहरे के साथ पाला पड़ा। ऐसा लग रहा था जैसे बारिश हो रही हो। तराई-भाबर में शनिवार नए वर्ष का सबसे ठंडा दिन रहा। यहां ठंड का पिछले चार साल का रिकॉर्ड टूटा है।

10 जनवरी 2011 को यहां अधिकतम तापमान 10.0 डिग्री और न्यूनतम तापमान 5.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था। 10 जनवरी 2015 यानी शनिवार को यहां का अधिकतम तापमान 11.2 और न्यूनतम तापमान 9.4 डिग्री सेल्सियस रहा।

इन चार सालों में 10 जनवरी को तराई-भाबर में इतनी ठंड नहीं पड़ी थी। पंत विवि के मौसम विज्ञानी डॉ. एचएस कुशवाहा ने रविवार को अधिकतम तापमान बढ़ने के साथ ही मौसम खुलने की संभावना जताई है।

उन्होंने बताया कि सुबह-शाम घना कोहरा लगेगा और ठंड का प्रकोप बढ़ेगा। वहीं, कोहरे के चलते कच्चा माल नहीं पहुंच पाने के कारण सिडकुल के उद्योगों में वीकेंड पर छुट्टी रहती है। 
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